भारतीय किसान पर निबंध | Essay on Indian Farmer in Hindi [2022]

आज का हमारा यह लेख उन विद्यार्थिओं के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगा जो इंटरनेट भारतीय किसान पर निबंध ढूंढ रहे हैं। हमारे इस लेख में भारत के किसानों के बारे में विस्तार से सारी जानकारी दी गयी है, तो चलिए पढ़ते हैं Bharatiya Kisan Par Nibandh (Essay on Indian Farmer) हिंदी में। 

भारत की आर्थिक स्थिति भारत के कृषि पर ही निर्भर है भारत की कृषि भारत के किसानों की मेहनत का ही बेहतर परिणाम है। हमारे किसान हर मौसम में मेहनत करने से पीछे नहीं हटते जिसका बेहतर परिणाम हमें देखने को मिलता है। वर्षों पहले जब भारत गुलाम हुआ करता था, तब अभी हमारे किसानों ने भरपूर मेहनत करते तथा बेहतर फसल उगाते थे।

परंतु तब भारत गुलाम था तथा हमारे खेतों में उपजे अनाज का ज्यादा फायदा ब्रिटिश शासकों को होता था। हमारी भूमि पर उपजे अनाज वह ले जाते तथा हमारे किसानों को उनके मेहनत का उचित परिणाम भी नहीं मिलता था परंतु इस समय किसानों की स्थिति बेहतर है। उनकी मेहनत का पूरा परिणाम उन्हें मिलता है तथा सरकार द्वारा भी किसानों की खेती के लिए ऋण लेने उनके अनाज के विक्री करने हेतु तथा सब्जी इत्यादि को बेचने में सरकार किसानों की पूरी मदद करती है

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भारतीय किसान पर निबंध – Essay on Indian Farmer in Hindi

हमारे भारतवर्ष को कृषि प्रधान देश माना जाता है। हमारे देश की आर्थिक व्यवस्था किसानों पर निर्भर है। भारतीय किसान हर समय हर मौसम में अपने कार्यों में सम्मिलित रहता है। कभी मेहनत करने से पीछे नहीं हटता है। भारतीय किसान बहुत ही सीधे सादे कपड़े पहनते हैं तथा किसी भी प्रकार की मेहनत करने से पीछे नहीं हटते। 

किसानों की मेहनत का परिणाम है कि भारत में अनाज की कमी नहीं होती है तथा हम इसका निर्यात भी परिपूर्ण तरीके से कर पाते हैं। विश्व में कोई भी व्यक्ति चाहे वह अमीर हो या गरीब किसानों पर ही पेट भरने के लिए निर्भर रहता है। कृषकों की कृषि पर ही मानव जीवन संभव है। किसानों द्वारा हर मौसम में मेहनत की जाती है । 

वह बरसात ,गर्मी ,जाड़ा इत्यादि की परवाह नहीं करते, किसी भी तरह के मौसम में दिन हो या रात अपने खेतों में काम करने से कतराते नहीं है।  किसानों के खेतों में जब फसलें पकती हैं तभी किसानों को परम सुख की प्राप्ति होती है। किसान जो फसल उगाते है तो उसे अपने पड़ोसी गांवों या शहरों में भी के माध्यम से पहुंचाते हैं। 

जिससे किसान अपने अनाजों व सब्जियों का आदान प्रदान करते हैं तथा सभी लोगों को सब्जियां व अनाज उचित मात्रा में मिल जाते हैं। अतः हमें हमारे किसानों का सम्मान करना चाहिए तथा जितना हो सके कृषि कार्यों में उनकी आर्थिक मदद भी करनी चाहिए। भारत के किसानों की वजह से ही भारत की आर्थिक नींव मजबूत बनी हुई है। भारत वर्ष किसानों  का ऋणी रहा है तथा किसानों पर ही निर्भर रहा है। 

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आम लोगों के प्रति सेवा भाव

किसान बिना किसी लालच के परिश्रम करते हैं। 12 महीने दिन रात हमेशा अपने खेतों में काम करने के लिए वह तत्पर रहते हैं। किसान अपने किसी कार्य को करने के लिए आलस नहीं करते, वह अपने फसलों की बुवाई, खेतों की जुताई तथा सिंचाई का काम उनके समय से ही करते हैं। किसानों द्वारा की गई मेहनत का परिणाम ही है जो सभी अमीरों और गरीबों का पेट भरता है। 

किसानों की इतनी मेहनत तथा इतनी तारीफ के बाद भी उनमें अहंकार नहीं होता तथा वह पूर्ववत ही अपने कार्य में लगन तथा कार्यशैली को उत्साहवर्धक बनाए रखते हैं। किसान निस्वार्थ भाव से आम नागरिकों की मदद करते हैं। किसान गांवों में गाय भैंसों की रखवाली करते हैं तथा दुग्ध उत्पादन करके उन्हें बड़े-बड़े शहरों में पहुंचाते हैं। 

जिससे कि सभी लोगों को दूध इत्यादि भरपूर मात्रा में प्राप्त हो सके। किसान को अन्नदाता कहा जाना उचित ही है। किसान  हमारे देश के आर्थिक व व्यावसायिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। बारहों महीने किसानों की मेहनत का ही परिणाम है कि हम कई प्रकार की फसलें प्राप्त करते हैं।

वर्तमान समय में कृषकों की स्थिति

वर्तमान समय में वर्तमान समय में किसान अत्यधिक मेहनत करते कर रहे हैं तथा वैज्ञानिकों के मदद से उन्हें मृदा परीक्षण के पश्चात मिट्टी  की बेहतर जानकारी हो जा रही है । जिससे कि किसान अपने खेत की मिट्टी की स्थिति को जानकर मिट्टी के अनुसार ही खेत में फसलें उगाते हैं, जिससे उन्हें अच्छा लाभ प्राप्त होता है। 

सरकार द्वारा भी किसानों की भरपूर मदद की जा रही है तथा टेलीविजन, मोबाइल फोन इत्यादि के माध्यम से हमारे किसानों को बेहतर से बेहतर लाभ देने की भी पूरी सुविधाएं मुहैया हुई है। किसानों को अत्यधिक खुशी होती है जब वह अपने खेतों में अपने द्वारा बोई गई फसलों को पकते हुए देखते हैं। जब किसान बीज डालते हैं तब वह उचित वर्षा चाहते हैं। 

और जब किसानों की फसलें परिपूर्ण हो जाती हैं तब वह पकने के लिए धूप की कामना करते हैं। किसान प्रकृति पर निर्भर है तथा प्रकृति किसानों पर। किसानों की परोपकारीता के बावजूद भी कुछ लोग किसानों के प्रति हीन दृष्टि रखते हैं तथा किसानों का सम्मान करने के जगह उन्हें अपमानित वह गिरा हुआ व्यक्ति समझते हैं। ऐसे लोगों को यह समझने की जरूरत है कि किसान विकासशील भारत का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है। अतः हमें इनका सम्मान करना चाहिए।

किसान दिवस

23 सितंबर का दिन किसान दिवस के नाम से जाना जाता है। 23 सितंबर का दिन किसानों को पूर्ण समर्पित है। प्रत्येक वर्ष किसान दिवस हमारे पूर्व प्रधानमंत्री जी चौधरी चरण सिंह की सम्मान में मनाया जाता है। सबसे कम समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने 28 जुलाई 1979 से लेकर 14 जनवरी 1980 तक देश हित में कार्य करने के लिए प्रधानमंत्री का पद संभाल रहे थे। 

चौधरी चरण सिंह एक किसान परिवार से थे। जिन्होंने किसानों के दर्द को समझते हुए किसानों के हित में कई योजनाएं लागू की थी। इनकी योजनाओं से किसानों के मन में नई उमंग का संचार हुआ तथा किसानों को सम्मानित स्थान मिला। किसानों के प्रति समर्पित उनके योजनाओं के लिए तथा उनके अच्छे कार्यों के लिए उनके जन्मदिवस को किसान दिवस के रुप में मनाया जाता है। 

23 सितंबर के दिन महान व्यक्तित्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का जन्म हुआ था। इसीलिए 24 सितंबर के दिन को किसान दिवस के रुप में मनाया जाता है। हालांकि वह एक किसान वर्ग से थे तथा किसानों के दर्द से परिचित थे, अतः उन्होंने  किसानों के हित में कार्य किया तथा किसानों के जीवन में खुशियां लाई।

उपसंहार

जैसा कि हम सभी जानते हैं किसान एक कृषि प्रधान देश है। हमारे यहां अनाज सिर्फ भारतीय नागरिकों के लिए ही नहीं बल्कि विदेशों में निर्यात भी किया जाता है । जिसका यह नतीजा है कि हमारे यहां की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनी हुई है। भारत का ज्यादातर हिस्सा ग्रामीण इलाकों में बसा हुआ है तथा ग्रामीणों के जीवन का मुख्य स्रोत कृषि होता है।

कृषि ही सशक्त भारत की एक मजबूत स्तंभ का नाम है । जिस पर हमारा भारत निर्भर है। किसानों द्वारा हर मौसम में की जाने वाली मेहनत का बेहतर परिणाम भारत वासियों का पेट भरता है । अतः हमें कृषकों का आभारी होना चाहिए। पशुपालन किसानों द्वारा किया जाता है तथा पूरे भारत में हम शहद, दूध , दही इत्यादि प्राप्त कर सकते हैं। यह सब किसानों की मेहनत का ही परिणाम है। 

तपती दोपहरी हो या गरजते बादल अथवा हड्डियां कपा देने वाली ठंड किसान कभी भी अपने कार्यों को करने से पीछे नहीं हटते तथा दिन रात मेहनत करके अच्छी फसल प्राप्त करते हैं । प्रत्येक नागरिक तक उसे पहुंचाते हैं। किसान हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है जिसके बिना जीवन की परिकल्पना करना संभव नहीं है।

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निष्कर्ष

आज का यह निबंध भारतीय किसान शीर्षक  पर आधारित है। यह एक महत्वपूर्ण टॉपिक है जो पाठ्यक्रम में तो पूछा ही जाता है, परंतु प्रतियोगी परीक्षाओं में भी भारतीय किसान पर निबंध लिखने से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं अंतः प्रतियोगी परीक्षाओं के विद्यार्थी में निबंध की पूरी तैयारी करें। स्कूली परीक्षार्थी के लिए भारतीय किसान पर निबंध एक आम प्रश्न है। जो अक्सर ही उनकी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं अतः आप निबंध का अपने शब्दों में परिवर्तन करें तथा बेहतर तरीके से लिखें। आशा करते हैं हमारा यह निबंध आपको अच्छा लगा होगा, आपके लिए मददगार सिद्ध होगा। यदि आप इस बारे में कोई सही सवाल या सुझाव देना चाहते हैं तो हमें कमेंट में जरूर बताएं।

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