15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर निबंध हिंदी में | प्रस्तावना, स्वतंत्रता दिवस का इतिहास और राष्ट्रीय पर्व

स्वतंत्रता दिवस भारत के इतिहास में बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। कई प्रतियोगी परीक्षाओं में विद्यार्थियों से स्वतंत्रता दिवस पर निबंध लिखने से जुड़े प्रश्न देखने को मिलते हैं। अगर आप भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं तो यह Essay in Hindi on Independence Day अवश्य पढ़ें।

स्वतंत्रता दिवस पर निबंध हिंदी में Independence Day (15 August) Essay in Hindi

प्रस्तावना

भारत की आर्थिक स्थिति भारत के कृषि पर ही निर्भर है भारत की कृषि भारत के किसानों की मेहनत का ही बेहतर परिणाम है। हमारे किसान हर मौसम में मेहनत करने से पीछे नहीं हटते जिसका बेहतर परिणाम हमें देखने को मिलता है। वर्षों पहले जब भारत गुलाम हुआ करता था, तब अभी हमारे किसानों ने भरपूर मेहनत करते तथा बेहतर फसल उगाते थे।

आजादी का दिन (Independence Day)

15 अगस्त सन 1947 में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भारत की राजधानी नई दिल्ली में लाल किले पर पहली बार हमारे तिरंगे को फहराया था, तथा लाल किले के प्राचीर से देशवासियों को अखंडता एकता की शक्तियों का बोध कराया था। यह दिन भारत वासियों को ब्रिटिश साम्राज्य के गुलामी से आजाद होने के उपलक्ष में मनाया जाता है। 15 अगस्त के दिन को उन वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है जिन्होंने अपने तन, मन और जीवन को हमारी मातृभूमि के लिए समर्पित कर दिया। स्वतंत्रता दिवस के दिन को भारत में एक बहुत ही गौरवान्वित त्यौहार की तरह मनाया जाता है। जिसमें प्रत्येक भारतवासी अपने जाति धर्म और अखंडता में एकता की शक्ति को पहचानते हैं और इस त्यौहार को धूमधाम से मनाते हैं।

स्वतंत्रता दिवस का इतिहास (History of Independence day of india in Hindi)

15 अगस्त 1947 से पूर्व हमारा देश अंग्रेजों के परतंत्रता की बेड़ियों में जकड़ा था। दिन प्रतिदिन ब्रिटिश शासकों का अत्याचार भारतवासियों के प्रति क्रूर होता जा रहा था। भारतवर्ष की मिट्टी में ही उपजे अनाज भारत वासियों का पेट भर पाने में सक्षम नहीं थे। भारतवर्ष की भूमि अनाज स्वर्ण या जमीन किसी पर भी हमारा पूर्ण अधिकार ना था। भारत के कृषकों से ब्रिटिश शासक जितना चाहे लगान मांगते खेती करवाते और उनसे पशुवत व्यवहार करते थे। अंग्रेजों की प्रताड़ना दी जाने वाली कहानियों के बारे में हम सभी जानते हैं। इन्हीं प्रताड़नाओ से परेशान होकर कुछ भारतीय नागरिकों ने साहसिक आंदोलनों की पहल की। उन्हीं के अथक प्रयासों से 15 अगस्त 1947 को हमें आजादी मिली। इस दिन एक स्वर्णिम इतिहास रचा गया। आजादी के बाद भारत में अखंडता अनेकता में एकता शांति व्याप्त हो गई। तथा 15 अगस्त 1947 की तरह हर वर्ष के 15 अगस्त के दिन भारतीय नागरिकों में उसी उत्साह के साथ इस पर्व को मनाया जाने लगा।

कब हुई थी स्वतंत्रता दिवस की शुरुआत (When did independence day start)

हम सभी जानते हैं कि 15 अगस्त 1947 के पहले का भारत ब्रिटिश शासकों के नियंत्रण में चलता था। परंतु 15 अगस्त 1947 का दिन इसलिए अविस्मरणीय है क्योंकि यही वह दिन था जब भारत देश अपने धर्म परंपरा और संस्कृतियों में बना तथा भारत वासियों को परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त कराया। 15 अगस्त 1947 की रात भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अपने भाषण ट्विस्ट विद डेस्टिनी पर भारत के आजादी की स्वर्णिम घोषणा की। उन्होंने कहा कई वर्षो की गुलामी के बाद यह 15 अगस्त का दिन वह समय है जब हमारे भारत में भारत के लोग अपना संकल्प निभाएंगे तथा अपना दुर्भाग्य दूर करेंगे। साथ ही उन्होंने बताया कि भारत एक ऐसा देश है जहां विभिन्न धर्म विभिन्न परंपरा और अनेक संस्कृति एक साथ निभा करते हैं। स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह से मनाया जाने वाला एक राष्ट्रीय पर्व है ।स्वतंत्रता दिवस के दिन को प्रत्येक भारतीय नागरिक को सम्मान तथा पूर्ण ईमानदारी दिखाते हुए अपने देश पर गर्व करना चाहिए। जिस दिन भारत को आजादी मिली थी उसी दिन को हम लोग भारत के स्वतंत्रता दिवस के रुप में मनाते हैं। स्वतंत्रता दिवस के दिन ही भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिली थी इसलिए यह त्यौहार हम भारत के नागरिकों के लिए विशेष महत्व रखता है। यह दिन हमें स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को भूलने नहीं देता।

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मातृभूमि के लिए जान का बलिदान (Sacrifice of Life for Motherland India)

अपने भारत के इतिहास में हमने बहुत सारे स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में पढ़ा है। इन स्वतंत्रता सेनानियों में गांधीजी भगत सिंह सुखदेव मंगल पांडे इत्यादि नाम उजागर है। हमारी मातृभूमि के इन वीरों का भारतवर्ष के आजादी में और अतुलनीय योगदान रहा है। यह आजादी हमें हमारी मातृभूमि के वीरो के पूर्ण समर्पण के बदले मिली हैं। 


गांधीजी भारतवर्ष के ही एक आम नागरिक थे जिन्होंने पूरी दुनिया को अहिंसा का पाठ पढ़ाया और इसी अहिंसा के बल पर उन्होंने पूरे भारतवर्ष को गुलामी से मुक्त करवाया था। जब हमारे देश में साइमन कमीशन का विरोध शांति से तरीके से हो रहा था तब अंग्रेजों ने हिंसक नीति अपनाई इसमें लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई। एक महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय की मृत्यु के बाद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने इसका बदला लिया और उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई।

हमारे भारतवर्ष की आजादी में कितने ही शहीद शहीद हुए हैं जिनमें से कुछ नाम जैसे बाल गंगाधर तिलक, मंगल पांडे, रानी लक्ष्मीबाईगणेश शंकर विद्यार्थी, मौलाना अबुल कलाम इत्यादि वीरों के नाम भारत के इतिहास में अमर हो गए हैं। परंतु इनके अलावा के ऐसे भी बहुत वीर है जिनके बारे में कोई इतिहास नहीं लिखा गया है परंतु मातृभूमि के आजादी में उनका भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

राष्ट्रीय पर्व (National Festival)

15 अगस्त 1947 का दिन स्वतंत्रता दिवस के नाम से जाना जाता है। प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त के दिन हमारे भारत देश में सभी संस्थानों में ध्वजारोहण का आयोजन होता है तथा इसमें बढ़-चढ़कर बच्चे, बड़े, बूढ़े हिस्सा लेते हैं। हर एक छोटा बड़ा बाजार सिर्फ तीन रंगों में रंगा हुआ नजर आता है। चारों तरफ तिरंगे की रौनक तथा इन्हीं रंगों की रंगोली व लाइटिंग पूरे बाजार को एक अलग ही तरीके से सजा देती हैं। 


पूरा भारत वर्ष ऐसा प्रतीत होता है कि सिर्फ तीन रंगों में समेटा जा चुका है। हफ्ते भर पहले से ही इस राष्ट्रीय त्योहार की पहल शुरू हो जाती है। इसमें हिस्सा लेने के लिए पूरा देश एकजुट रहता है वह हिंदू हो मुसलमान हो या किसी भी धर्म का नागरिक हो खुशी से इस पर्व को मनाने के लिए उत्सुक रहता है। 15 अगस्त के दिन देशभक्ति गीतों से सबका मन थिरक उठता है, पूरा देश एकजुट होकर इस त्यौहार को मनाने के लिए विवश हो जाता है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम सभी का मन मोह लेता है तथा सबको मातृभूमि पर शहीद हुए वीरों की याद दिलाता है।

उपसंहार

भारत वर्ष के इतिहास के बारे में कौन जानता है। पहले हमारा देश ब्रिटिश शासकों का गुलाम था। जमीन हमारी होती थी खुदाई में निकले स्वर्ण उनके, मेहनत भारतीय किसानों द्वारा की जाती थी परंतु अनाज उनके थे। अंग्रेज शासक चर्चा है मनमाना लगान वसूलते थे तथा भारतीय नागरिकों के साथ भेदभाव का व्यवहार प्रदर्शित करते उनका अत्याचार सहन न कर पाने की स्थिति में भारतीय नागरिकों ने आंदोलन छेड़ दिया। जिसमें कितने हैं नागरिक शहीद हो गए। आज उन वीरों का नाम इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में नामांकित है। 


जिसमें महात्मा गांधी, भगत सिंह, सुखदेव मंगल पांडे, लाला लाजपत राय आदि नाम अमर हो गए हैं। इन वीरों के चलाए गए आंदोलनों की वजह से अंग्रेजों ने अपनी हार स्वीकार की तथा 15 अगस्त 1947 के दिन भारत के स्वतंत्र होने की घोषणा की गई। 15 अगस्त 1947 में ही भारत के प्रथम राष्ट्रपति पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले से संपूर्ण देश को संबोधित किया तथा उनकी एकता और अखंडता की शक्ति से मिली जीत को सराहनीय बताया। तभी से स्वतंत्रता दिवस के त्यौहार मनाने की शुरुआत हुई। आज भारत को आजाद हुए 74 साल हो गए परंतु स्वतंत्रता दिवस मनाने का उत्साह भारतीय नागरिकों में वैसा ही उत्साह भर देता है ।

निष्कर्ष (Conclusion)

हमने कई प्रतियोगी परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्रता दिवस (15 August) की पोस्ट लिखी है हम आशा करते हैं आपको यह पोस्ट पसंद आएगी। यदि इसके बारे में आप कि कोई सवाल यह सुझाव है तो हमें कमेंट में जरूर बताएं।

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