जानें सुलेख क्या होता है और क्यों जरूरी है । What is Sulekh Lekhan in Hindi

आज के इस आर्टिकल में हम आपको सुलेख से जुड़े तथ्यों के बारे में बताएंगे। सुलेख क्या है (What is Sulekh in hindi), सुलेख का अर्थ (Meaning of Sulekh), Sulekh Lekhan के लिए वाक्य और सुलेख का महत्व क्या होता है। 

जैसा कि हम सभी जानते हैं सुलेख सभी बच्चों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता। किसी भी प्रकार का ज्ञान कर लेने के बाद उसका प्रयोग करने से  अनुभव मिलता है उसी प्रकार Sulekh Lekhan से बच्चों की लेखनी पर इसका प्रभाव शाली असर देखने को मिलता है। इस आर्टिकल में आपको सुलेख से जुड़ी विषय पर जानकारी देखने को मिलेगी। अतः आप सबसे निवेदन है कि Sulekh in Hindi आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

कक्षा 1 के विद्यार्थियों से लेकर कक्षा आठ तक के सभी विद्यार्थियों को उनके शिक्षकों द्वारा सुलेख लिखने (Sulekh Lekhan) की सलाह दी जाती है। शायद ही कोई ऐसा विद्यालय हो जहां बच्चों को आलेख हौसले की शिक्षा ना दी जाती है सुलेख प्रारंभिक शिक्षा का ही एक भाग होता है जो हम सभी को कक्षा एक से कक्षा 8 तक की नियमित कक्षाओं में पढ़ाया जाता है।

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सुलेख क्या होता है और क्यों जरूरी है – What is Sulekh in Hindi

सुलेख जैसा कि शब्द से ही स्पष्ट है सू का अर्थ है सुंदर तथा लेख का अर्थ है लिखावट अर्थात सुंदर लिखावट को हम सुलेख (calligraphy) कहते हैं। जब बच्चे लिखना सीख जाते हैं तो शिक्षकों द्वारा उनकी लिखावट को सही क्रम देने के लिए बच्चों से सुलेख का अध्ययन करवाया जाता है। जिसमें उन्हें कुछ बातें ध्यान में रखकर अपनी लिखावट को बेहतर बनाना होता  सुलेख लिखना (Sulekh Lekhan) हर बच्चे के लिए आवश्यक होता है। सुलेख लिखने से बच्चों का ध्यान उनकी लिखावट पर रहता है जिससे बच्चों की लिखावट सुधरती है तथा उन्हें लिखने का काफी बेहतर अनुभव हासिल होता है।

सुलेख के लिए आवश्यक बातें (Essentials for Calligraphy in Hindi)

यदि कोई बच्चा सुलेख लिखना चाहता है तो उसे निम्नलिखित बातों का ध्यान देना चाहिए।

उसे पूरे वर्णमाला का भली-भांति ज्ञान होना चाहिए। हम सभी जानते हैं की लिखावट में वर्णमाला विशेष होती है।

बच्चों को मात्राओं का पूरा ज्ञान होना चाहिए। कुछ बच्चे मात्राओं में भीड़ नहीं कर पाते जिसके कारण उनकी हस्त लेखन की कला तो अच्छी रहती है परंतु उनके द्वारा चुने गए शब्दों में कुछ त्रुटियां पाई जाती हैं। अतः उन्हें सब तो में उपयोग की जाने वाली मात्राओं का उचित एवं सही उपयोग करना चाहिए।

सुलेख लिखने के लिए विद्यार्थियों को रेखा खींची वाली पुस्तिका का उपयोग करना चाहिए इस पुस्तिका पर उपयोग करने से छात्रों द्वारा लिखे गए शब्द एक बराबर होते हैं तथा देखने में सुंदर दिखाई पड़ते हैं।

अक्सर सुलेख लिखने के लिए पेंसिल का उपयोग करना चाहिए। क्योंकि आरंभ में सुलेख लिखते समय बच्चों द्वारा गलतियां होती हैं जो पेन से लिखने पर पुनः ठीक नहीं की जा सकती। अतः पेंसिल का उपयोग करने पर छात्र उन शब्दों को सटीक रूप दे पाएंगे।

सुलेख लिखने में सबसे आवश्यक बात होती है कि आप द्वारा लिखा गया लेख सुंदर दिखाई पड़े। अतः आपको शब्दों को एक बराबर क्रम में लिखना चाहिए कभी-कभी शब्दों का आकार बड़ा छोटा होने पर भी लिखावट अपना प्रभाव नहीं दिखा पाते। इसलिए शब्दों को एक बराबर रूप से प्रयोग में लाना चाहिए।

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सुलेख लिखने के लिए 12 वाक्य (12 Sulekh Lines in Hindi)

सुलेख लिखने के लिए आप कुछ वाक्य का उपयोग कर सकते हैं जैसे बच्चों को प्रेरणा देने वाली बातें सामान्य ज्ञान से जुड़ी बातें या नैतिक शिक्षा से जुड़ी बातों का उपयोग हम सुलेख के लिए कर सकते हैं।

यहां हम आपको सुलेख लिखने के लिए कुछ वाक्य बता रहे हैं जो निम्नलिखित हैं-

1. हमें बड़ों का आदर करना चाहिए।

2. सुबह जल्दी उठना चाहिए।

3. सभी जीवो से प्यार करना चाहिए।

4. बिना आज्ञा दूसरों की वस्तुएं नहीं लेनी चाहिए।

5. हमारा देश महान है।

6. हमें प्रतिदिन विद्यालय जाना चाहिए।

7. हमें भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए।

8. सरस्वती वंदना प्रत्येक विद्यार्थी के लिए अनिवार्य होनी चाहिए।

9. प्रत्येक मनुष्य को सच बोलना चाहिए।

10. हमें अन्याय के खिलाफ खड़े रहना चहिए।

11. हमें स्वच्छ कपड़े पहनने चाहिए।

12. हमें सुबह उठकर योगाभ्यास करना चाहिए।

सुलेख का महत्व (Importance of Sulekh in Hindi)

विद्यार्थियों के लिए सुलेख का बहुत ही बड़ा महत्व है। सुलेख हुआ बिहार से जिससे विद्यार्थियों के लिखावट में सुधार होता है तथा लेखनी संबंधी उनकी समस्याएं और कुछ त्रुटियां दूर हो जाती हैं।  1 से 8 तक के विद्यार्थियों को सुलेखा का नियमित अभ्यास कराया जाना अनिवार्य होता है। लगभग सभी विद्यालयों में अध्यापकों द्वारा सुलेख का अभ्यास कराया जाता है। जिससे बच्चों की लेखनी प्रभावशाली होती है तथा उसमें त्रुटियां नहीं रहती।

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सुलेख की विशेषताएं – Benfits of Sulekh in Hindi

विभिन्न शैलियों को मिलाकर लिखी जाने वाली वह हस्तकला जो छात्रों को प्रभावित करती है तथा उसके द्वारा लिखे गए लेख को एक प्रभावशाली लेख के रूप में उत्क्रमित करती हैं सुलेख कहलाती है। सुलेख लिखने से  ना सिर्फ विद्यार्थियों का हस्तलिपि में प्रदर्शन आता है बल्कि ध्यान केंद्रित करने में भी मददगार होता है। 

सुलेख लिखते समय छात्रों का मन उनके लेखक एक वाक्य पर रहता है जिससे वह अपनी लिखने को बेहतर बनाते हैं। शिक्षकों द्वारा सुलेख का महत्व इसी बात से पता चलता है कि प्रथम कक्षा से ही बच्चे को सुलेख का अध्ययन करा जाता है। प्रतिदिन सुलेख लिखने से छात्रों की हस्तलिपि अच्छी होती है तथा लिखावट में आने वाली कई प्रकार की छुट्टियां दूर हो जाती है।

सुलेख की विधियां (प्रकार) – Types of Sulekh in Hindi

सुलेख लिखने की कई प्रकार की विधियां होती हैं। यहां हम आपको बताएंगे कि सुलेख लिखने की कौन-कौन सी विधियां हैं और उन्हें कैसे परिभाषित किया गया है।

1). खंडशःरेखा लेखन विधि – Khandash Rekha Lekhan Vidhi

इस विधि के अंतर्गत छात्रों को अक्षरों को तोड़ तोड़ कर लिखना सिखाया जाता है। यह प्रारंभिक सुलेख लेखन विधि हैं। इस विधि में बच्चों को अक्षरों का ज्ञान कराया जाता है।

2). मांटेशरी विधि – Montessori Vidhi

इस लेखन विधि में छात्रों को उनकी हस्तकला से लिखने में आंख, कान और हाथ का इस्तेमाल करना सिखाया जाता है। इसमें विद्यार्थी को अपने आंख का नूर हाथ की मदद से उसकी हस्त लेखन का अध्ययन कराया जाता है। जैसे शिक्षकों द्वारा किसी लकड़ी की गद्दी पर बच्चों से चित्र बनाने को कहा जाना। दैनिक जीवन में उपयोग की जाने वाली चीजों की मदद से बच्चे को सुलेख लिखने में मदद करना इत्यादि ‌।

3). जैकपॉट विधि – Jackpot Vidhi

इस विधि के अंतर्गत छात्रों को उनके शिक्षकों द्वारा किसी उपवाक्य या अक्षर को याद करा देने के बाद उसी वाक्य अक्षर को छात्रों द्वारा लिखवाने का अध्ययन कराया जाता है। जिससे छात्र स्वयं की अशुद्धि दूर करते हैं तथा सफल लेखन में क्रियाशील होते हैं।

4). पेस्टोलॉजी विधि – Pestology Vidhi

पेस्टोलॉजी लेखन कला के अंतर्गत कोई भी छात्र एक एक बड़े वाक्य को तोड़कर छोटा करता है तथा अपने सुलेख में चुने गए शब्दों का अध्ययन करते हैं। इससे बच्चों के स्मरण शक्ति भी मजबूत बनी रहती है।

5). अनुकरण विधि – Anukaran Vidhi

यह विधि अक्सर सभी विद्यालयों में प्रयोग में लाई जाती है। इस विधि के अंतर्गत किसी एक वाक्य को अध्यापक द्वारा श्यामपट्ट पर लिख दिया जाता है तथा सभी बच्चे उसका अनुसरण करते हैं और अपनी उत्तर पुस्तिका में लेखन करते हैं।

6). स्वतंत्र लेखन विधि – Swatantra Lekhan Vidhi

इस विधि के अंतर्गत छात्रों की बौद्धिक क्षमता की परीक्षा होती है। यह बच्चों के मानसिकता पर निर्भर होता है तथा बच्चे स्वयं से ऐसे लिखते हैं।

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शिक्षकों द्वारा लिखाई जाने वाले सुलेख – Hindi Sulekh for School 

यह तो हम सभी जानते हैं कि कक्षा 1 से लेकर कक्षा आठ तक के सभी विद्यार्थियों के लिए सुलेख लिखना अनिवार्य है। शिक्षा भी प्रयास करते हैं कि विद्यार्थियों द्वारा सुलेख पर ध्यान दिया जा सके। शिक्षक एक वाक्य को पुस्तिका में या श्यामपट्ट पर लिख देता है तथा बच्चे उसका अनुसरण करते हैं। 

अनुसरण करते करते बच्चे लेखन कला में दक्ष होने लगते हैं तब शिक्षक द्वारा सुलेख का अभ्यास बोलकर भी कराया जाता है। कुशाग्र बुद्धि छात्र स्वयं भी सुलेख लिख सकते हैं। सुलेख लिखने से विद्यार्थियों की लेखन कला में वृद्धि होती है। तथा लिखने में त्रुटियां कम होने के अवसर बढ़ जाते हैं। Sulekh Lekhan से विद्यार्थियों की मानसिक कुशलता का भी पता चलता है। सुलेख प्रत्येक बच्चे के लिए आवश्यक है और सुलेख का अध्ययन करने से लेखन से संबंधित समस्याएं दूर हो सकती।

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निष्कर्ष – Conclusion

आज के इस आर्टिकल में हमने सुलेख क्या होता है (What is Sulekh Lekhan in Hindi) और सुलेख से जुड़े बिंदुओं पर टिप्पणी की है। सुलेख कक्षा एक से कक्षा आठ तक के सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य है। हम आशा करते हैं कि Sulekh Lekhan का यह आर्टिकल आपको अच्छी लगा होगा यदि यह आपके लिए मददगार है तो अपने दोस्तों से भी शेयर करें। सुलेख से जुड़े किसी भी बिंदु पर आपके सवाल है सुझाव हो तो  कमेंट में जरूर बताएं।

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