हमारी मातृभाषा हिंदी पर निबंध 500, 250, 100 और 150 शब्दों में

आज का यह आर्टिकल (लेख) हमारी मातृभाषा हिंदी पर निबंध | Essay on Matrubhasha in Hindi पर आधारित है यह प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम से संबंधित हिस्सा भी है। अतः सभी विद्यार्थियों से अनुरोध है कि हमारी मातृभाषा हिंदी पर निबंध पढ़ने तथा इसे अपने शब्दों में लिखने का पूरा अध्ययन करें।अपनी परीक्षा में ये निबंध  लिख कर आप अधिक अंक प्राप्त कर सकते हैं।

आज हमने जो आर्टिकल लिखा है उसमें हमारी मातृभाषा हिंदी पर निबंध 500 शब्दों में (Long Essay on Matrubhasha in Hindi), 250 शब्दों में (Short Essay on Matrubhasha in Hindi), 100 और 150 शब्दों में मिलेगा। 

हमारी मातृभाषा हिंदी पर निबंध Essay on Matrubhasha (Mother Tongue) in Hindi

व्यक्ति के जन्म के साथ साथ उसके जन्म स्थान पर जो भाषा बोली जाए वह उसकी मातृभाषा होती है। मातृभाषा को मां के समान ही सम्मान दिया गया है। ‌किसी भी व्यक्ति को उसकी मातृभाषा (Mother Tongue) बोलने में किसी प्रकार का संकोच नहीं करना चाहिए। 

मातृ भाषा प्राचीन काल से चली आ रही भाषाओं में से एक होता है। मातृभाषा प्रत्येक व्यक्ति को आनी अनिवार्य होती है। भारत देश की राष्ट्रभाषा हिंदी है। हिंदी पूरे विश्व में सर्वश्रेष्ठ भाषा में से एक भाषा है। भले युवाओं में आजकल अंग्रेजी भाषा को लेकर रुचि बढ़ी है परंतु अभी भी प्रत्येक युवा अपनी मातृभाषा का सम्मान करता है तथा मातृभाषा के लिए समर्पित है। 

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मातृभाषा को एक धरोहर के रूप में सम्मानित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस धरोहर को बचा कर रखना चाहिए तथा हमें इसका विकास भी करना चाहिए, भारत के ज्यादातर लोगों ने अपनी मातृभाषा के रूप में हिंदी को स्वीकार किया है अतः यह हमारा उत्तर दायित्व है कि हम हिंदी का प्रचार प्रसार करें।

मातृभाषा पर निबंध 100 शब्दों में Eessay on Matrubhasha 100 Words

हिंदी भाषा को हमारी राष्ट्रभाषा के रूप में जाना जाता है। हिंदी भाषा की मदद से हमें दुनिया में अलग पहचान मिली है। यह भाषा प्राचीन इतिहास से हमारे भारत में बोली जाती है। 14 सितंबर के दिन को हम लोग हिंदी दिवस के रूप में मनाते हैं। 

14 सितंबर के दिन सभा में यह निर्णय लिया गया कि हिंदी भाषा की खड़ी बोली को भारत की राष्ट्रभाषा घोषित किया जाएगा। 14 सितंबर 1953 के दिन  से ही हिंदी को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। हमारी राष्ट्रभाषा बोलने में किसी प्रकार का कोई संकोच नहीं होता तथा इसे हम विश्व में सबसे सरल एवं समृद्ध भाषा भी कह सकते हैं।

मातृभाषा पर निबंध 150 शब्दों में Matrubhasha Hindi Nibandh 150 Words

मातृभाषा किसी भी व्यक्ति की सामाजिक पहचान होती है। हम मातृभाषा से अपने संस्कार तथा  व्यवहार को ग्रहण करते हैं और मातृभाषा की मदद से ही हम अपनी धरोहर को आगे बढ़ाते हैं अनेक जगहों की अलग-अलग भाषाएं होती हैं जो देश के विभिन्न संस्कृतियों को बताती हैं। कहा गया है-

निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल

बिना निज भाषा ज्ञान के मिटे न हिय के‌ शूल।।

अपनी भाषा को जानकर उसका उपयोग करना है यह में उन्नति के मार्ग पर ले जाता है। बिना अपनी मातृभाषा के ज्ञान के हम कोई भी अन्य ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकते जिससे हमारे अंदर की अज्ञानता दूर नहीं होती है।

प्रत्येक मनुष्य को अपनी मातृभाषा को बढ़ावा देना चाहिए तो था मातृभाषा के बढ़ाओ से हमारे सांस्कृतिक आगे बढ़ते हैं।

मातृभाषा पर निबंध 250 शब्दों में Matrubhasha Essay 250 Words in Hindi

जन्म लेने के उपरांत मनुष्य जो प्रथम भाषा बोलना सीखता है वहीं उसके सामाजिक एवं मातृ भाषा के रूप में जानी जाती है। हम अपने सारे संस्कार अपनी मातृभाषा द्वारा ही प्राप्त करते हैं। मातृभाषा सिर्फ हमारी भाषा ही नहीं बल्कि संस्कृति और हमारी धरोहर है। 

अलग-अलग जगहों के अलग-अलग भाषाएं अनेकता में एकता को प्रदर्शित करती हैं। यह तो सभी जानते हैं कि भारत में अनेकों भाषाएं बोली जाती हैं तथा भारत एक बहुभाषी राष्ट्र है। यहां प्रत्येक जगह की प्रत्येक भाषाएं जो भारत का उत्तर दायित्व संभाले हुए हैं। हम सभी को अपनी मातृभाषा का सम्मान करना चाहिए।

हमारी मातृभाषा हमारी मां के बराबर होती हैं मातृभाषा से ही हम अपने व्यवहारिक ज्ञान को प्राप्त करते हैं। इसलिए हमें सदैव मातृभाषा का सम्मान करना चाहिए। मातृभाषा शिक्षा संस्थानों में महत्व रखती है। 

यदि कोई बच्चा मातृभाषा ना सके तो वह शायद अन्य किसी भाषा का ज्ञान प्राप्त नहीं कर पाएगा। वर्ष 2011 की भूतपूर्व जनगणना के अनुसार 43 % लोग हिंदी को अपनी मातृभाषा के रूप में स्वीकार कर चुके हैं।

हमारी मातृभाषा हिंदी पर निबंध 500 शब्द Essay on Matrubhasha (Mother Tongue) 500 Words

प्रस्तावना (Introduction)

व्यक्ति के जन्म लेने के पश्चात उसके निवास स्थान पर बोली जाने वाली भाषा की मातृभाषा होती है। भारतवर्ष के हिंदी भाषा को 43% लोगों ने अपनी  मातृभाषा के रूप में स्वीकार किया। यह बस भाषा ही नहीं बल्कि हमारी धरोहर है हमें हमारी मातृभाषा का सम्मान करना चाहिए।

मातृभाषा का महत्व (Importance of Matrubhasha in Hindi)

भारतेंदु हरिश्चंद्र जी ने कहा है कि हमारी मातृभाषा हमारे मां के समान होती हैं। जिस प्रकार  जन्म लेने पर मनुष्य के साथ उसकी मां रहती है उसी प्रकार जन्म के साथ ही हम अपने आसपास एक भाषा का अनुभव करते हैं तथा उसे सीखते हैं। 

यही भाषा हमारी मातृभाषा होती है। अतः  मातृभाषा भी मां के समान ही है। हमें अपनी मातृभाषा का उतना ही सम्मान करना चाहिए जितना कि हम अपनी मां का सम्मान करते हैं। हरीश चंद्र जी ने कहा है जो व्यक्ति अपनी मातृभाषा को नहीं समझता और नहीं जान सकता वह किसी भी अन्य भाषा को नहीं समझ सकता। 

भारत देश में अधिकतम जगहों की मातृभाषा हिंदी है। 14 सितंबर के दिन को हम हिंदी दिवस के रुप में मनाते हैं।

शिक्षण संस्थानों में मातृभाषा को वरीयता देना (Preference to Mother Tongue in Educational Institutions)

स्कूलों की पुस्तकों में मातृभाषा को वरीयता दी जाती है। क्योंकि बच्चे प्रारंभिक शिक्षा का ज्ञान अपनी मातृभाषा से करें तो उनकी समझ विकसित होती है। शिक्षा संस्थानों में भी मातृभाषा को वरीयता दी जाती है।  

स्कूलों में तो मातृभाषा सभी विषयों की योग्यता पूर्णता और सफलता का कारण बनती है। किसी विद्यार्थी की शिक्षा का सफल होना उसके अंदर ज्ञान तथा उसके मस्तिष्क का विकास उसके मातृभाषा द्वारा ही संपन्न किया जा सकता है, व्यक्ति किसी भी भाषा का ज्ञानवान क्यों ना हो उसे अपनी मातृभाषा से अधिक आदरणीय और कोई भाषा नहीं हो सकती। 

शिक्षण संस्थानों में भी पाठ्यक्रम में मातृभाषा को महत्वपूर्ण स्थान देकर इस तथ्य की पुष्टि की गई है।

मातृभाषा हिंदी (Mother Tongue Hindi)

हम सभी को ज्ञात है कि हम भारतीयों की मातृभाषा हिंदी है। मातृभाषा होने के साथ-साथ भारत वासियों की राष्ट्रभाषा भी हिंदी है। 14 सितंबर के दिन हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में घोषित किया गया। 14 सितंबर को दिन को हम हिंदी दिवस के रूप में मनाते हैं। 

आज की दुनिया में हिंदी प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं वह विज्ञान का क्षेत्र हो इंटरनेट की दुनिया हो या मनोरंजन का कोई अन्य साधन। हम भारतीयों को चाहिए कि हम अपनी मातृभाषा सीखने पर ज्यादा ध्यान दें तथा इसमें ही अपने गौरव  की अनुभूति होती है।  

परंतु आज के दिन में बहुत सारे लोग अंग्रेजी भाषा सीखने पर जोर दे चुके हैं तो उन से अनुरोध है कि वह अपनी मातृभाषा सीखे इसका प्रयोग करें क्योंकि मातृभाषा व्यक्ति की धरोहर होती है इसका विकास हमारा कर्तव्य है।

उपसंहार Epilogue

हमारी मातृभाषा ही हमारे राष्ट्र का गौरव है। हमारे राष्ट्र के गौरव को सहेजे रखना हर एक युवा का परम कर्तव्य है। कहीं ना कहीं मातृभाषा के अस्तित्व को बचाने में असफल हुए हैं, इसी कारण पिछले सालों लगभग भारत में बोले जाने वाली 50 मातृभाषा है पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है।

व्यक्ति को यह सीखने की जरूरत है कि हमें हमारी मातृभाषा को अपनाना चाहिए तथा आने वाली पीढ़ी को मातृभाषा का ज्ञान कराकर अपनी धरोहर को सदैव उज्जवल बनाए रखना चाहिए। मातृभाषा के अस्तित्व को बचाने के लिए 21 फरवरी के दिन को पूरे विश्व में मातृभाषा दिवस के रूप में जाना जाता है।

निष्कर्ष Conclusion

प्रस्तुत लेख मातृभाषा पर निबंध Essay on Matrubhasha in Hindi नामक शीर्षक से लिया गया है। इसलिए हमने हिंदी में मातृभाषा पर निबंध लिखा है तथा मातृभाषा के महत्व को समझाया है। सभी विधार्थी इसे एक अनिवार्य शीर्षक मान कर इसका अध्ययन अवश्य करें। मातृभाषा पर निबंध एक अनिवार्य विषय है। इसका अध्ययन करके अपने शब्दों में लिखने का प्रयास अवश्य करें। निबंध लेखन की दृष्टि से यह पोस्ट मददगार सिद्ध हुई हो तो इसे अपने दोस्तों से भी शेयर करें। मातृभाषा के बारे में आपका क्या विचार है मैं कमेंट में जरूर बताएं।

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