अयस्क किसे कहते हैं | What is Ore in Hindi | अयस्क के प्रकार और उपयोग

आज का हमारा टॉपिक बहुत ही महत्वपूर्ण है आज बात करेंगे की अयस्क किसे कहते हैं, अयस्क क्या होता है और अयस्क कितने प्रकार के होते हैं। तो आईये जानते हैं अयस्क के प्रकार और अयस्क के उदाहरण सरल हिंदी भाषा में (Ore in Hindi)। 

हमारी प्रकृति में कई प्रकार के धातुएं उपलब्ध होते हैं जिनके माध्यम से हम उनके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्राचीन समय से ही कई प्रकार की ऐसी चीजें प्राप्त होती हैं जिनमें कहीं ना कहीं हमारे लिए उपयोग किया जाता रहा है और जिसके माध्यम से हम सफलतापूर्वक उसे नए सांचे  में ढालते हुए नए नए कार्य कर सकते हैं। ऐसे में आज हम आपको अयस्क (Ore) के बारे में जानकारी देने वाले हैं (Ayask Kise Kahate Hain) जो निश्चित रूप से ही आपके लिए कारगर होंगे।

अयस्क किसे कहते हैं ? What is Ore in Hindi

यह मुख्य रूप से उन खनिजों को कहा जाता है जिनमें शुद्ध धातु का निष्कर्षण आसानी के साथ हो सकता है और जिनमें कम खर्च में ज्यादा से ज्यादा काम किया जा सकता है उसे अवश्य कहा जाता है। यहां पर एक बात गौर करने लायक है कि सभी अयस्क खनिज हो सकते हैं लेकिन सभी खनिज अयस्क नहीं होते हैं। कभी-कभी दुविधाओं का सामना करना पड़ता है लेकिन लेकिन मुख्य रूप से अगर ध्यान दिया जाए तो अयस्क शुद्ध धातु को ही माना जाता है।

दरअसल अयस्क एक प्रकार का खनिज होता है जिसके अंदर मूल्यवान पदार्थ स्थित होते है। कभी-कभी अयस्को कों को खनन के माध्यम से ही बाहर निकाला जाता है और फिर अधिकांश अयस्क ऑक्साइड या सल्फाइड जैसे रासायनिक यौगिक बना लेते हैं।

अयस्क के विभिन्न प्रकार 

अयस्क को कई भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है और उसे सही तरीके से समझा भी जा सकता है।

1) सल्फाइड अयस्क – यह मुख्य अयस्क के रूप में देखा जाता है जिनमें धातु अपने सल्फाइडों के रूप में होते हैं। सल्फाइड अयस्क मुख्य रूप से अपने रूप में बदलाव करते हैं और इस वजह से इसे एक अलग ही प्रवृत्ति  प्रदान होती है।

अयस्क के उदाहरण 

  • लैंड— गैलेना ( Pbs)
  • कॉपर— कॉपर पायराइट ( CuFeS2)
  • जिंक— जिंक ब्लेंडी (  Zns)
  • आयरन— आईरन पायराइट ( FeS2)

2) प्राकृतिक अयस्क— इन अयस्को  में धातु अपनी स्वयं की  अवस्था में ही पाई जाती है लेकिन कभी-कभी इनमें कुछ अशुद्धियां जैसे कि रेत, मिट्टी, कंकड़ भी पाए जाते है।  उदाहरण के रूप में प्लैटिना, सोना, चांदी इत्यादि।

3) कार्बोनेट अयस्क —- इन अयस्को में धातु अपने कार्बोनेट के रूप में पाए जाते हैं जिनके माध्यम से उनके गुणों में भी परिवर्तन देखा जाता है और जो कहीं ज्यादा प्रभावी हो जाते हैं।

  • मैग्नीशियम— मैग्नेसाइट (MgCO3)
  • कॉपर—- मेलेकाइट { Cu(OH)2.CuCO3)
  • जिंक—- कैलेमाइन ( ZnCO3)
  • लैंड —- सेरूसाइट (  PbCO3)

4) क्लोराइड अयस्क— इन अयस्को  में धातु में अपने क्लोराइड रूपों में होते हैं। 

  • सोडियम— रॉक साल्ट (NACL)
  • पोटेशियम— सिलवाइन (KCL)
  • सिल्वर— हॉर्न सिल्वर (AgCl)

5) ऑक्साइड अयसक — इन में धातु अपने ऑक्साइड रूपों में होते हैं जिनका मुख्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है।

  • एल्युमिनियम बॉक्साइट
  • जिंक जिनकाइट
  • Iron Hematite

कुछ महत्वपूर्ण अयस्क

कुछ महत्वपूर्ण प्रकार के अयस्क उपलब्ध होते हैं जिनके बारे में विस्तार से जानकारी लेते हुए लिखा समझा जा सकता है।

1) Aluminium — बॉक्साइट, केयोनिनाइट

2) आयरन — हेमेटाइट, मैग्नेटाइट, पायराइट

3) कॉपर — कॉपर पायराइट, मेलेकाइट, कॉपर ग्लास, क्यूप्राइट

4) जिंक — जिंक ब्लेंडे, कैलेमाइन, जिंकाइट

अयस्क की प्रमुख प्रवृत्ति

हमेशा अयस्क को मुख्य प्रवृत्ति के रूप में देखा जाता है जहां पर यह एक प्राकृतिक चट्टान या तलछट की तरह होते है। इनमें ऐसे धातु में उपलब्ध होती हैं जिनका आसानी के साथ पृथक्करण किया जा सकता है और समय पड़ने पर इनको बेचकर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इस को मुख्य रूप से धरती के अंदर से निकाला जाता है और फिर इसे गलाने के माध्यम से परिष्कृत किया जाता है या फिर अलग किया जाता है।

कभी-कभी यह पूर्ण रूप से खनिज के रूप में कार्य नहीं करते हैं और बेकार चट्टानों के साथ भी मिश्रित होने लगते हैं।

अयस्क  का मुख्य उपयोग

सामान्य तौर से अयस्क का उपयोग खनिज के रूप में किया जाता है जहां पर इसके माध्यम से निष्कर्षण करते हुए आगे का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा यदि अयस्क में किसी प्रकार की अशुद्धि है तो इसका उपयोग भी अन्य तत्वों के रूप में किया जाता है जो कहीं ज्यादा प्रभावशील नहीं होते हैं लेकिन फिर भी इनका  उपयोग करना आसान माना जाता है। 

ऐसे में विभिन्न प्रकार के खनिजों के अयस्क  के माध्यम से भी सही तरीके से जानकारियां ली जा सकती है और जिन का उपयोग हम विभिन्न रूपों में करते हैं।

अयस्को का पृथक्करण

जब भी किसी अयस्क की प्राप्ति होती है तो उसका पृथक्करण ही किया जाता है लेकिन इसके लिए बड़ी प्रोसीजर होती है जहां पर कई क्रम में कार्यों को पूरा किया जाता है और कभी-कभी पृथक्करण के लिए बड़ी-बड़ी मशीनों का भी इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में प्राचीन समय में पृथक्करण की विभिन्न विधियां अपनाई गई थी लेकिन आज के समय में अयस्को का पृथक्करण करना मशीनों के माध्यम से आसान हो चुका है जहां पर प्रत्येक तत्वों का पृथक्करण करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है।

प्राचीन समय की विफलताएँ

प्राचीन समय में जब भी अयस्क का पृथक्करण करने की बात आती थी तो उसमें थोड़ी कठिनाइयां महसूस होती थी लेकिन जैसे जैसे समय बदलता गया वैसे वैसे काम आसान होता चला गया। प्राचीन समय में निश्चित रूप से ही इस कार्य को करने में अधिक समय लग जाता था और पूर्ण रूप से धातु प्राप्ति नहीं हो पाती थी। ऐसे में निश्चित रूप से ही आज के समय में विभिन्न प्रकार के अयस्क की प्राप्ति हेतु कई प्रकार के परिवर्तन किए गए हैं जो कहीं ना कहीं आपके लिए और हम सभी के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

अयस्को  का आयात और निर्यात

वैसे तो सारे अयस्क धरती के नीचे से ही प्राप्त होते हैं लेकिन फिर भी इन्हें शुद्ध रूप में लाने के बाद निर्यात कर दिया जाता है, जो विभिन्न देशों में जाता है और जहां पर शुद्ध होने के बाद कई सारी प्रक्रिया होने लगती है फिर इसका उपयोग किया जाता है। उसी प्रकार से कुछ ऐसे भी अयस्क होते हैं जिन्हें विदेशों से मंगवाया जाता है ताकि उस के माध्यम से भी व्यापार व्यवसाय किया जाए और ज्यादा से ज्यादा धन अर्जित किया जाए साथ ही साथ लोगों को भी इससे विशेष सुविधाएं दिया जाए और इन सभी अयस्क के महत्व को समझाया जा सके। 

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