राज्यपाल को शपथ कौन दिलाता है? नियुक्ति से लेकर कार्यकाल, वेतन की पूरी जानकारी

आज हम आपको राज्यपाल के बारे में विशेष रूप से जानकारी देने वाले हैं जैसे की राज्यपाल को शपथ कौन दिलाता है, राज्यपाल कौन होते हैं ? राज्यपाल के अधिकार , राज्यपाल की नियुक्ति, वेतन आदि।  जिनके माध्यम से ही कई तरीके से जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जाता है जिससे जनता को किसी प्रकार का नुकसान ना होने पाए।

भारत की राजनीति में कई सारे ऐसे दिग्गज हैं जिनके माध्यम से देश को सही दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है और नागरिकों को भी विशेषाधिकार दिया जाता है। ऐसे में समुचित रूप से ही प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, राज्यपाल की विशेष भूमिका दिखाई देती है जहां पर अपने देश का विकास करना इन सभी का मुख्य उद्देश्य होता है। तो आईये बिना देर किये पढ़ते हैं ये आर्टिकल जिसका शीर्षक है Rajyapal Ko Shapath Kon Dilata Hai कृपया इस आर्टिकल को अंत तक पढ़ें। 

राज्यपाल कौन होते हैं?

भारत के संविधान को सुरक्षित रखने के लिए कई सारे लोगों की जिम्मेदारी रहती है कि सही तरीके से नियमों का पालन किया जा सकें। इस कड़ी में राज्यपाल का नाम भी सबसे ऊपर आता है। दरअसल राज्यपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 के अनुसार प्रत्येक राज्य का एक सिपाही होता है, जो केंद्र सरकार का प्रतिनिधि होता है साथ ही साथ एक राज्यपाल के अंतर्गत कई सारी शक्तियां विद्यमान होती हैं जिनमें राज्य और कार्यपालिका की शक्ति निहित होती है।

इसके अलावा विभिन्न प्रकार के सरकारी कार्यों में राज्यपाल की विशेष सहमति प्रदान होती है जिसके अंतर्गत मंत्रिमंडल के अधीन रहकर कार्यों को अंजाम दिया जाता है।

राज्यपाल को शपथ कौन दिलाता है? Rajyapal Ko Shapath Kon Dilata Hai

जिस प्रकार किसी भी पद में आने के बाद राजनेताओं को शपथ लेना होता है उसी प्रकार से राज्यपाल को भी विशेष रूप से शपथ दिलाया जाता है। ऐसी स्थिति में किसी भी राज्य के राज्यपाल को शपथ  उस राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के माध्यम से शपथ दिलाया जाता है जिसके बाद ही राज्यपाल अपना कार्यभार संभाल सकते हैं लेकिन राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है।

राज्यपाल की नियुक्ति

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में राज्यपाल की नियुक्ति जनता के द्वारा नहीं किया जाता है बल्कि प्रत्येक राज्य के राज्यपाल का चुनाव केंद्र सरकार की सलाह के द्वारा राष्ट्रपति के माध्यम से किया जाता है। जब राज्यपाल की नियुक्ति की जाती है,तो  उसके पहले राष्ट्रपति द्वारा राज्य के मुख्यमंत्री से परामर्श लेना अनिवार्य समझा जाता है ताकि सही तरीके से संवैधानिक व्यवस्थाओं को बनाया जा सके और किसी भी प्रकार की दिक्कत को दूर किया जा सके।

राज्यपाल के प्रमुख अधिकार क्या है?

राज्यों के राज्यपालों को भी कुछ विशेष अधिकार प्राप्त हैं जिसके अंतर्गत रहकर वे राज्य की जनता की भलाई के बारे में भी सोचते हैं।

1) किसी भी राज्यपाल के पास यह अधिकार होता है कि वह मुख्यमंत्री की नियुक्ति करने का पूरा अधिकार रखते हैं साथ ही साथ इससे संबंधित पदों पर भी नियुक्ति कर सकते हैं।

2) राज्यपाल एक ऐसा व्यक्ति होता है, जो किसी भी दोषी की सजा में परिवर्तन कर सकता है साथ ही साथ किसी प्रकार के सजा को भी पूर्ण रूप से खत्म किया जा सकता है|

3) राज्यपाल को विधानसभा के द्वारा कई सारे अधिकार प्राप्त होते हैं जिसके अंतर्गत संसद को किसी भी प्रकार का संदेश और संबोधन भेजा जा सकता है।

4) यदि किसु राज्य में किसी भी दल को बहुमत प्राप्त नहीं होता है,तो ऐसी स्थिति में राज्यपाल विशेष अधिकार के अंतर्गत मुख्यमंत्री का चुनाव कर सकते हैं|

5) राज्यपाल की सही और पूरी सहमति होने के बाद राज्य का वार्षिक वित्तीय विवरण विधानसभा में पेश किया जाता है, जहां पर किसी भी प्रकार की मांग को भी रखा जा सकता है।

राज्यपाल के शपथ की मुख्य शर्ते

जब भी राज्यपाल की शपथ होती है, तो उसमें कुछ मुख्य शर्तों का आकलन किया जाता है ताकि उनका सही तरीके से निर्वहन किया जा सके।

1) जब भी राज्यपाल की शपथ की जाती है, तो सबसे पहले गोपनीयता की शर्त रखी जाती है जिसके अंतर्गत कुछ विशेष रुप से ही बातों के बारे में जानकारी दी जाती है।

2) इसके अलावा राज्यपाल की शपथ में इस बात को भी शामिल किया जाता है कि देश और राज्य के हित के बारे में पूर्ण रूप से विचार करते हुए फैसले लिए जाएंगे।

3) किसी भी प्रकार से देश और राज्य को हानि पहुंचाने वाले मुद्दों पर बात नहीं की जाएगी।

4) हमेशा राज्य हित में रहते हुए अथक प्रयास किए जाएंगे और सांस्कृतिक, सामाजिक रुप से भी आगे बढ़ने के लिए राज्य वासियों को प्रेरित किया जाएगा।

5) हमेशा स्वयं से पहले राज्य के बारे में सोचा जाएगा और किसी प्रकार की परेशानी होने पर उसका निवारण जल्द से जल्द करने की कोशिश की जाएगी।

राज्यपाल का कार्यकाल

राज्यपाल का कार्यकाल मुख्य रूप से 5 वर्ष का होता है जिसके पश्चात नए राज्यपाल की नियुक्ति की जाती है। इन 5 वर्षों में राज्यपाल पूर्ण रूप से अपने राज्य के लोगों के लिए समर्पित रहते हैं, जहां उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत होने पर या परेशानी आने पर कड़े फैसले लेने के लिए भी राज्यपाल बाध्य होते हैं।

राज्यपाल का वेतन

राज्यपाल का वेतन प्रतिमाह  ₹350000 निर्धारित किया गया है। पिछले कुछ दशकों से राज्यपाल के वेतन में इजाफा किया गया है लेकिन इसके अलावा भी उन्हें कई सारी सुविधाएं प्राप्त हैं।

राज्यपाल को माना जाता है महत्वपूर्ण व्यक्तित्व

किसी भी राज्य के राज्यपाल को महत्वपूर्ण व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है क्योंकि राज्यपाल हमेशा राज्य हित में बात करते हैं और अपने महत्वपूर्ण फैसलों को सुरक्षित रखते हैं। ऐसे में राज्यपाल को हमेशा अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए आगे बढ़ते देखा जा सकता है और उन्हें किसी भी प्रकार से संकट काल की स्थिति में भी महत्वपूर्ण फैसले लेते हुए देखा जाता है ऐसे में राज्यपाल को महत्वपूर्ण व्यक्तित्व के रूप में देखना सर्वथा सही माना जाएगा।

राज्यपाल को हटाने की प्रक्रिया

कई बार विपरीत परिस्थितियों के आने पर राज्यपाल को हटाने की प्रक्रिया पूर्ण की जाती है। ऐसे में राज्यपाल को राष्ट्रपति के आदेशों के द्वारा ही हटाया जा सकता है। ऐसे में यदि किसी राज्यपाल को कार्यकाल के बीच में हटाया जाए तो केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस बारे में वार्तालाप के बाद ही कड़े फैसले लिए जाते हैं लेकिन इस बात पर भी जोर दिया जाता है कि किसी भी राज्यपाल का कार्यकाल पूरा किया जाए ताकि बाद में फिर दिक्कत महसूस ना हो लेकिन कभी-कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है जब राष्ट्रपति को आगे बढ़कर कड़े फैसले लेने होते हैं।

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