संस्मरण किसे कहते हैं | संस्मरण का महत्व | जानें सरल भाषा में [2022]

आज हम आपको हिंदी साहित्य के ही मुख्य संस्मरण के बारे में जानकारी देंगे और जानेंगे संस्मरण किसे कहते हैं तथा इसके प्रकार कौन से हैं। जो निश्चित रूप से ही आज के समय में ज्यादा उपयोग किया जाता है और जिस का महत्व आज के समय में भी बरकरार है।

हिंदी साहित्य में कई सारी ऐसी विधाएं होती है जिनके माध्यम से हम हिंदी के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी हासिल कर सकते हैं। ऐसे में हम प्राचीन काल से ही कई सारी विधाओं के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं और सही तरीके से ज्ञान अर्जन कर सकते हैं।

संस्मरण क्या है ?

दरअसल संस्मरण दो शब्दों से मिलकर बना है, जो सम और स्मरण होता है। इसका तात्पर्य किसी विशेष घटना, व्यक्ति या वस्तु के स्मृति के आधार पर उसके बारे में बताना या वर्णन करना संस्मरण के अंतर्गत आता है। संस्मरण में जिन बातों का उल्लेख किया जाता है, वे सभी सत्य घटना पर आधारित होते हैं जिनमें कल्पना का कोई भी स्थान नहीं होता है। संस्मरण के माध्यम से अपनी जीवनी या किसी विशेष विषय के बारे में भी उल्लेख किया जा सकता है और साथ ही साथ घटनाओं के बारे में विस्तृत तरीके से अध्ययन किया जाता है।

संस्मरण की विशेषता

संस्मरण की खास तौर से विशेषता यह होती है कि इसमें उसी चीज के बारे में लेखक के द्वारा जिक्र किया जाता है जिसे उसने स्वयं देखा हो या फिर पहले कभी महसूस किया हो। इसके अलावा संस्मरण में सिर्फ तथ्यात्मक पहलू के बारे में बात की जाती है जिसमें विभिन्न प्रकार का विस्तार से विवरण होता है। 

इसके अलावा संस्मरण किसी विशेष व्यक्ति के जीवन के ऊपर भी लिखा जा सकता है, जो सत्य घटना पर आधारित हो और जिसके माध्यम से थोड़ी जानकारी हासिल हो सके। ऐसे में पाठकों को भी विशेष रूचि होने लगती है और वह संस्मरण को एक नए तरीके से पढ़ना पसंद करते हैं। संस्मरण के माध्यम से प्राचीन बातों को भी समझा और सीखा जा सकता है साथ ही साथ भाषा शैली के बारे में भी जानकारी ली जाती है।

संस्मरण के प्रकार

संस्मरण मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं जिनके माध्यम से अपनी बात को बोला जा सकता है।

1) आत्म संस्मरण–  इस प्रकार का संस्मरण मुख्य रूप से अपनी स्मृति या अपने अनुभव के आधार पर लिखा जाता है। इसके अलावा संस्मरण लिखते समय उस व्यक्ति से भी बातचीत किया जा सकता है जिसके बारे में लिखना हो।

2) दूसरे से सुनकर लिखे गए संस्मरण– इस प्रकार के संस्मरण में मुख्य रूप से उन बातों को जिक्र किया जाता है जो किसी दूसरे के द्वारा कही जाती है या सुनी जाती है।उन  बातों को अपने शब्दों में लिखने से संस्मरण का एक नया रूप बनता है। इस प्रकार के संस्मरण में कुछ विशेष पुट डाला जाता है जिससे संस्मरण को एक नया रूप के साथ नई जानकारी भी दी जा सकती है।

संस्मरण के तत्व

जब भी संस्मरण लिखा जाए तो कुछ मुख्य बातों का ध्यान रखना होगा ताकि सही तरीके से बातों को जाहिर किया जा सके।

1) प्रामाणिकता

2) अतीत की स्मृति

3) प्राथमिकता

4) चित्रात्मकता

5) जीवन का विशेष चित्रण

6) अतीत की  स्मृति

संस्मरण है साहित्य की एक विधा

जिस प्रकार साहित्य में कई प्रकार की विधा होती है उसी प्रकार संस्मरण भी एक प्रकार की विधा है जिसे कई सारे विद्वानों ने अपनी लेखनी में शामिल किया है। इसके माध्यम से भी साहित्य के बारे में उचित जानकारी प्राप्त होती है और निश्चित रूप से ही एक नया आयाम प्राप्त किया जाता है। अगर आपको हिंदी साहित्य में रुचि है, तो आपके लिए संस्मरण रोमांचक होने वाला है जो कहीं ना कहीं हिंदी साहित्य को बेहतर बनाते हैं। इसके अलावा संस्मरण में लिखी गई बातें दिल छू लेने वाली होती है जिनको बार-बार पढ़ने पर भी वह घटना लोकप्रिय हो जाती है।

हिंदी का प्रथम संस्मरण

हिंदी साहित्य का प्रथम संस्मरण बालमुकुंद गुप्ता द्वारा सन 1907 मैं प्रताप नारायण मिश्र पर लिखे संस्मरण को हिंदी का प्रथम संस्मरण कहा जाता है। धीरे-धीरे लोगों के द्वारा संस्मरण के बारे में ज्यादा जानकारी हासिल की गई और फिर नए युग की तरह संस्मरण का भी विकास होता चला गया।

कुछ प्रमुख संस्मरण

आज हम आपको कुछ मुख्य संस्मरण के बारे में बता रहे हैं जिन्हें पढ़ना आपके लिए रोमांचक होगा।

1) स्मृति की रेखाएं

2) अतीत के चलचित्र

3) जालक

4) शिकार

5) बोलती प्रतिमा

6) माटी की मूरतें

7) मील के पत्थर

8) लाल तारा

9) गेहूं और गुलाब

10) जंगल के जीव

11) जंजीर और दीवारें

12) प्राणों का सौदा

संस्मरण की सीमाएं

जब भी संस्मरण लिखा जाता है तो इसकी कुछ सीमाओं के बारे में भी सही तरीके से जानकारी होनी चाहिए।

1) संस्मरण लिखते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी बात को बढ़ा चढ़ाकर ना लिखा गया हो।

2) जब भी संस्मरण लिखा जाए तो यह  ध्यान रहे कि किसी के भी छवि को नुकसान न पहुंचे।

3) संस्मरण में लिखी जाने वाली भाषा सरल और रोचक होनी चाहिए।

4) पत्रकारिता में भी संस्मरण को विशेष स्थान दिए जाने की बात की जाती है।

5) कभी-कभी संस्मरण में विशेष घटनाओं को छोटे रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

6) संस्मरण लिखने के लिए धैर्य होना चाहिए और पूरा ध्यान अपने संस्मरण पर होना चाहिए।

7) जब भी संस्मरण लिखा जाए तो एक बात ध्यान रखना चाहिए कि कभी भी उसे घुमा फिरा कर नहीं लिखना चाहिए और हमेशा पॉइंट में ही लिखना चाहिए।

8) संस्मरण में आवश्यक रूप से संवेदनशीलता और यथार्थ चित्रण होना चाहिए।

संस्मरण का महत्व

वैसे तो संस्मरण प्राचीन समय से ही लिखा जाता रहा है लेकिन फिर भी आज के समय में भी संस्मरण का महत्व कहीं ज्यादा बरकरार है। संस्मरण के माध्यम से युवा वर्ग को भी एक नई प्रेरणा दी जा सकती है साथ ही साथ उन्हें जीवन के बारे में भी नई सीख देते हुए आगे बढ़ाया जा सकता है। जब भी संस्मरण लिखा जाता है, तो उसमें कई प्रकार की ऐसी बातों का समावेश होता है जो हमारे दैनिक जीवन से प्रभावित होता है। ऐसे में संस्मरण के माध्यम से भी नई बातों को सीखा जा सकता है।

ऐसे में हिंदी साहित्य पढ़ना हमारे लिए गौरव का विषय हो जाता है, जहां हमें कई सारी बातों को एक साथ समावेश प्राप्त होता है और जिनके माध्यम से हम  नई बातों को सीख कर आगे बढ़ सकते हैं। 

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