सबसे छोटी प्राकृतिक संख्या कौन सी है | पाठ परिचय कक्षा 10 | गणित

आज हम आपको प्राकृतिक संख्या से संबंधित जानकारी देने वाले हैं, जिससे आप भी इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकें। आईये जानते हैं सबसे छोटी प्राकृतिक संख्या कौन सी है, प्राकृतिक संख्या क्या होती है और प्राकृतिक संख्या के प्रकार के बारे में विस्तार से जानते हैं। 

हमारे द्वारा अध्ययन किए गए विषयों में मुख्य रूप से गणित विषय का अध्ययन किया जाता है जिनमें हम कई प्रकार के नए फार्मूले को सीखते हुए अपने ज्ञान को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर भी हम आगे बढ़ सकते हैं और सही तरीके से गणित को समझ सकते हैं। 

प्राकृतिक संख्या क्या होती है?

मुख्य रूप से प्राकृतिक संख्या उस संख्या को कहते हैं जिसके माध्यम से किसी भी चीज की गणना शुरू की जाती है। मुख्य रूप से हम यह कह सकते  हैं कि प्राकृतिक संख्या हमेशा हर रूप में हमारे काम आती है जो धनात्मक मूल्यों से शुरू होती है और ऐसी स्थिति में प्राकृतिक संख्या को हमेशा धनात्मक मूल्यों के माध्यम से देखा जाता है। 

प्राकृतिक संख्याओं की खोज

प्राकृतिक संख्याओं की खोज के बारे में ज्यादा प्रमाण प्राप्त नहीं है लेकिन फिर भी ऐसा माना जाता है कि प्राकृतिक संख्याओं की खोज उपमहाद्वीप से हुई थी जहां पर लोगों ने संख्या का भरपूर इस्तेमाल किया है।

सबसे छोटी प्राकृतिक संख्या कौन सी है?

जब हम प्राकृतिक संख्या को विस्तार से देखते हैं, तब हमें इस बात की जानकारी होती है कि प्राकृतिक संख्या हमेशा 1 को ही माना जाता है। अगर गौर किया जाए तो किसी भी संख्या की शुरुआत शून्य से होती है लेकिन कभी भी  शून्य का कोई विशेष मान नहीं होता है ऐसी स्थिति में हमेशा प्राकृतिक संख्या 1 को माना जाता है। प्राकृतिक संख्या हमेशा अनंत तक चलती रहती है जिसका कोई भी अंत नहीं होता है और हमेशा आगे की ओर बढ़ती रहती है।

प्राकृतिक संख्या के प्रकार

ऐसे तो सुनने में प्राकृतिक संख्या बहुत ही छोटी प्रतीत होती है लेकिन प्राकृतिक संख्या का भी विशेष महत्व माना जाता है जिसमें इसके भी विभिन्न प्रकार होते हैं।

1) सम प्राकृतिक संख्या— यह एक ऐसी प्राकृतिक संख्या है, जो मुख्य रूप से 2 से विभाजित हो सकती है और जिस में किसी भी प्रकार का शेषफल नहीं बचता है। उदाहरण के रूप में 2,4,6,8 सम प्राकृतिक संख्या के अंतर्गत आते हैं।

2) विषम प्राकृतिक संख्या— यह एक ऐसी प्राकृतिक संख्या है जो कभी भी 2 से विभाजित नहीं होती है और इसके आखिर में हमेशा कोई ना कोई शेषफल  बचा ही रहता है। उदाहरण के रूप में 3,5,7,9 विषम प्राकृतिक संख्या के अंतर्गत आते हैं।

3) अभाज्य प्राकृतिक संख्या— यह एक ऐसी प्राकृतिक संख्या है, जो हमेशा एक से ही विभाजित होती है। ऐसे में आप संपूर्ण संख्या को अभाज्य प्राकृतिक संख्या मान सकते हैं।

कुछ प्रमुख प्राकृतिक संख्याओं का सूत्र

यहां पर हम आपको कुछ प्रमुख प्राकृतिक संख्याओं के सूत्रों के बारे में जानकारी देने वाले हैं, जो कहीं ना कहीं आपके लिए फायदेमंद साबित होते हैं।

1) प्रथम n प्राकृतिक संख्याओं का योग= (n+1)/2

2) प्रथम n सम प्राकृतिक संख्याओं का कुल योग =  n+1

3) प्रथम n विषम प्राकृत संख्याओं का कुल योग= n

4) लगातार विषम प्राकृतिक संख्याओं का योग= (n/2+1)

5) विषम प्राकृतिक संख्याओं का औसत= (n+1)/2

प्राकृतिक संख्याओं के बारे में रोचक तथ्य

ऐसे तो हम सभी प्राकृतिक संख्याओं का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करते हैं लेकिन फिर भी इन से जुड़ी कुछ रोचक तथ्यों के बारे में उचित जानकारी हासिल नहीं कर पाते हैं।

1) प्राचीन समय में प्राकृतिक संख्याओं को अरबी संख्या के रूप में जाना जाता था, जो निश्चित रूप से ही उस समय ज्यादा उपयोग किया जाता था।

2) 1 के अलावा शून्य को भी प्राकृतिक संख्या माना जाता है लेकिन उसका कोई खास मान नहीं होता है।

3) प्राकृत संख्याओं को सामान्य रूप से “n” के माध्यम से सूचित किया जाता है।

4) जब भी प्राकृतिक संख्याओं का इस्तेमाल किया जाता है, तो हमेशा एक इकाई बढ़ती चली जाती है जिसके कारण मान परिवर्तन होता है।

5) जब किसी प्राकृतिक संख्या को जोड़ा जाता है तो योगफल भी प्राकृतिक ही होता है।

6) इसी प्रकार प्राकृतिक संख्या के गुणनफल भी हमेशा एक प्राकृतिक संख्या ही होती है जिसके माध्यम से अपने मान को परिवर्तन किया जा सकता है।

7) सबसे ज्यादा उपयोग होने वाला प्राकृतिक संख्या एक ही होती है जो गणित को सरल बनाती है।

प्राकृतिक संख्याओं का उपयोग

वैसे तो प्राकृतिक संख्याओं का उपयोग गणितीय भाषा में किया जाता है जहां पर विशेष स्थितियों में इसका उपयोग करते हुए सैद्धांतिक रूप से मान में परिवर्तन देखा जाता है। ऐसे में इनके विभिन्न प्रकार के उपयोग को बताना आसान होता है—

1) प्राकृतिक संख्याओं का उपयोग विज्ञान के क्षेत्र में किया जाता है।

2) कभी-कभी इन मुख्य प्राकृतिक संख्याओं का उपयोग खगोल विज्ञान और कंप्यूटर संबंधी जानकारियों को हासिल करने के लिए भी किया जाता है जिसके बाद स्थिति में परिवर्तन देखा गया है।

3) कुछ प्राकृतिक संख्याओं का उपयोग मेडिकल क्षेत्र में भी किया जाता है और आगे भी विस्तार किए जाने की बात की जाती है।

4) जब भी गणित की शुरुआत की जाती है, तो हमेशा प्राकृतिक संख्याओं का उपयोग किया जाता है। ऐसे में प्राकृतिक संख्याओं के बिना गणित अधूरा माना जाता है।

प्राकृतिक संख्याओं का महत्व

सामान्य रूप से ऐसा देखा जाने लगा था कि प्राकृतिक संख्याओं का महत्व बढ़ गया था क्योंकि किसी भी संख्या को विस्तार करने के लिए प्राकृतिक संख्या का होना आवश्यक माना जाता था। हालांकि प्राचीन समय में ऐसा कहना कई लोगों को सही नहीं लगता था और इसके पीछे भी कई प्रकार के तर्क दिए जाने लगे थे लेकिन बीते कुछ दशकों से प्राकृतिक संख्याओं की गणितज्ञों ने सही और सटीक रूप से जानकारी दी है। ऐसे में नियमित रूप से प्राकृतिक संख्याओं के महत्व को दर्शाया गया है और साथ ही साथ ज्यादा से ज्यादा इनका उपयोग भी किया जाने लगा है।

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