समाजवादी अर्थव्यवस्था से क्या आशय है | अर्थव्यवस्था के लक्षण, परिभाषाएं पूरी जानकारी

आज के इस आर्टिकल के माध्यम से आपको हम बताएँगे समाजवादी अर्थव्यवस्था से क्या आशय है और महत्वपूर्ण परिभाषाएं विस्तार सहित। कृपया समाजवादी अर्थव्यवस्था की विशेषताएं क्या है What is Socialist Economy in Hindi और समाजवादी से क्या समझते हैं? इन प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए इस आर्टिकल को अंत तक पढ़ें। 

समाजवादी अर्थव्यवस्था से क्या आशय है। आइए यह प्रश्न निबंध की भाषा में जाने। यहां पर समाजवादी अर्थव्यवस्था पर निबंध (Samajwadi Arthavyavastha Par Nibandh) हिंदी में बताया जा रहा है, इसे आप पढ़ सकते हैं निम्नलिखित दिया है –

दुनिया में अर्थव्यवस्था तीन तरह की होती हैं- पूंजीवादी अर्थव्यवस्था और दूसरी समाजवादी अर्थव्यवस्था, इसके अलावा तीसरी अर्थव्यवस्था को मिश्रित अर्थव्यवस्था कहा जाता है। सामाजिक अर्थव्यवस्था का आशय यह होता है कि जहां सरकारें  अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करती है उसे समाजवादी अर्थव्यवस्था कहा जाता है। जबकि पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में नियंत्रण निजी संस्थानों का होता है। पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में  सभी  सेवाएं निजी हाथों में होती है।  जबकि मिश्रित अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण सेवाएं जैसे सेना, न्यायालय, पुलिस व्यवस्था आदि को छोड़कर कई सेवाएं जैसे यातायात के साधन, शिक्षा, बिजली इत्यादि की सेवाएं प्राइवेट क्षेत्रों  द्वारा संचालित होती है। पूंजीवादी व्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था का मिलाजुला स्वरूप मिश्रित अर्थव्यवस्था होती है।

समाजवादी अर्थव्यवस्था का मतलब है कि पूंजीवादी व्यवस्था के कारण किसी एक व्यक्ति का पूंजी पर एकाधिकार न हो बल्कि सभी संपत्ति पर समाज के सभी लोगों का अधिकार होता है, इसे समाजवादी अर्थव्यवस्था कहते हैं। 

सामाजिक अर्थव्यवस्था (Socialist Economy) की महत्वपूर्ण परिभाषाएं

सामाजिक अर्थव्यवस्था किसी सरकार द्वारा नियंत्रित होती है। इसकी महत्वपूर्ण परिभाषा इस तरह से हैं-  प्रोफ़ेसर डिकिन (Professor Dickins Ke Anusar) के अनुसार समाजवाद समाज का एक ऐसा आर्थिक संगठन है, जिसमें उत्पत्ति के भौतिक संसाधन में समाज का नियंत्रण होता है। इसका संचालन समाज के उत्तरदायित्व संस्था के स्वामित्व द्वारा होता है। यह सभी के भले के लिए काम करता है।

समाजवादी अर्थव्यवस्था (Socialist Economy) के प्रमुख लक्षण 

 उत्पत्ति के साधनों पर सामूहिक और सामाजिक स्वामित्व होता है।  किसी लोकतांत्रिक सरकार समाजवादी अर्थव्यवस्था के पक्षधर है तो वह शिक्षा व्यवस्था को अपने नियंत्रण में संचालित करेगी। सभी विद्यालय समाज के लिए  होता है  और उससे मिलने वाला आर्थिक और सामाजिक लाभ सभी के लिए  होता है।

समाजवादी अर्थव्यवस्था में बिजली, पानी, शिक्षा, सड़क आदि की व्यवस्थाएं सरकार द्वारा निशुल्क की जाती है। इसका लाभ वहां के नागरिक उठाते हैं। यह सब निजी की हित वाली अर्थव्यवस्था होती है।

समाजवादी अर्थव्यवस्था में उत्पादन और वितरण में किसी प्राइवेट संस्था का हस्तक्षेप नहीं होता है बल्कि इसमें सरकार का नियंत्रण होता है। इसलिए सरकार इस अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण रखती है। इसलिए महंगाई व जमाखोरी नहीं होता है। 

निजी संपत्ति को सीमित अधिकार

सामाजिक अर्थव्यवस्था में प्राइवेट कंपनियों यानी निजी संस्थाओं को निजी संपत्ति रखने का केवल सीमित अधिकार दिया जाता है। संपत्ति रखने का अधिकार भी एक सीमा तक समाजवादी अर्थव्यवस्था में दिया जाता है।  भौतिक सुविधाओं को रखने का अधिकार सामाजिक अर्थव्यवस्था में तो दिया जाता है जैसे कार, टीवी, स्कूटर, मकान इत्यादि लेकिन मकान बेचकर लाभ कमाने का अधिकार समाजवादी अर्थव्यवस्था में नहीं होता है।  आवश्यकता से अधिक जमीन खरीदना और उसे बेचना समाजवादी अर्थव्यवस्था में सीमित किया जाता है।  समाजवादी व्यवस्था जनकल्याणवादी व्यवस्था के अंतर्गत गरीब से गरीब इंसान को भी जीने का अधिकार प्रदान करता है। 

सामाजिक अर्थव्यवस्था में लिए जाने वाले फैसले

सामाजिक अर्थव्यवस्था (Socialist Economy) में दिए जाने वाले फैसले सभी के लाभ के लिए लिया जाता है। किसी व्यक्ति विशेष के लाभ वाले फैसले इसमें नहीं लिया जाता है। सामाजिक अर्थव्यवस्था के पक्षधर सरकार अपनी नीति में अधिकतम जनकल्याणकारी योजना को क्रियान्वित करते हैं। अधिकतम जनकल्याण की भावना समाजिक अर्थव्यवस्था में होती है।

आर्थिक नियोजन

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था से विपरीत समाजवादी अर्थव्यवस्था में आर्थिक प्रणाली सामूहिक शक्ति वाली होती है। आर्थिक नियोजन यानी आर्थिक प्रक्रिया में उपभोग, उत्पादन, वितरण, विनियोग, पूंजी आदि के फैसले सरकार स्वयं लेती है। समाजवादी अर्थव्यवस्था  (Socialist Economy) में श्रम और सेवा का महत्व होता है, इसके लिए मजदूरी और वेतन अच्छा मिलता है। पूंजीवादी व्यवस्था की तरह एक या दो लोगों के हाथों में पूरी संस्थान की व्यवस्था नहीं होती बल्कि समाजवादी व्यवस्था के अंतर्गत सभी लोगों की सहभागिता उस संस्थान में होती है। 

शोषण की समाप्ति

समाजवादी अर्थव्यवस्था  (Socialist Economy) में योग्यता के अनुसार उचित काम मिलता है। काम के अनुसार सही वेतन मिलता है। इसलिए किसी तरह का भ्रष्टाचार और शोषण नहीं होता है। जबकि पूंजीवादी व्यवस्था में एक व्यक्ति द्वारा निर्णय लिया जाता है और वह मजदूरों  और कामगारों का शोषण करता है इसमें मांग और पूर्ति का सिद्धांत काम करता है। जिस कारण से कम मजदूरी और कम वेतन पर कामगार रखने के लिए पूंजीवादी व्यवस्था के लोग मजदूरों और कामगारों का शोषण करते हैं। 

उपसंहार

पूंजीवादी और मिश्रित अर्थव्यवस्था से अलग समाजवादी अर्थव्यवस्था  एक अच्छी व्यवस्था है। इस अर्थव्यवस्था में  योग्य लोगों को मान-सम्मान और तरक्की मिलता है।  सभी को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार मिलता है। सामाजिक अर्थव्यवस्था के कारण पूंजी का वितरण सभी में बराबर से होता है। इस व्यवस्था में किसी का एकाधिकार नहीं रह जाता है। कमजोर और गरीब तबकों को भी रोजगार मिलता और उनका जीवन स्तर ऊंचा उठाने में मदद मिलती है। 

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में अनावश्यक प्रतियोगिता होता है जिस कारण से लोगों में भय होता है और सामाजिक जीवन परेशानियों से भरा होता है जबकि सामाजिक अर्थव्यवस्था (Socialist Economy) में  किसी पूंजीवादी व्यक्ति या कंपनी का एकाधिकार नहीं होता इस कारण से सभी व्यक्तियों को उनकी योग्यता के अनुसार काम मिलता है। समाजवादी अर्थव्यवस्था में  सामाजिक और आर्थिक रुप से कमजोर नागरिकों को जन कल्याण योजना के तहत लाभ भी देती जिससे कि उनका सामाजिक स्तर ऊंचा हो सके जबकि पूंजीवादी व्यवस्था में जनकल्याण की सोच नहीं होती है।

आशा करता हूँ की समाजवादी अर्थव्यवस्था से क्या आशय है इस आर्टिकल के माध्यम से आपको ज्ञात हो गया होगा। इस आर्टिकल में हमने समाजवादी अर्थव्यवस्था के विभिन विषयों पर सटीक जानकारी दी है। कृपया इसे अपने दोस्तों मित्रों के साथ ज़रूर साँझा करें। धन्यवाद।  

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