हड़प्पा किस नदी के किनारे स्थित है | हड़प्पा सभ्यता की पूरी जानकारी [2022]

हड़प्पा किस नदी के किनारे स्थित है, इस आर्टिकल को पूरा पढ़िए आपको हड़प्पा सभ्यता के बारे में सब पता चल जायेगा। हड़प्पा की खोज की खोज से लेकर हड़प्पा सभ्यता की स्थापना, हड़प्पा सभ्यता का दूसरा नाम, हड़प्पा किस नदी के किनारे स्थित है की पूरी जानकारी इस आर्टिकल में बड़ी सरल भाषा में बताई गयी है। कृपया Harappa Kis Nadi Ke Kinare Sthit Hai आर्टिकल को पूरा ज़रूर पढ़ें। 

प्राचीन भारतीय संस्कृति मैं कई प्रकार के सभ्यता के बारे में जानकारी प्राप्त होती है जिसके अंतर्गत हम प्राचीन भारत के बारे में भी जानकारी हासिल कर सकते हैं। ऐसे में कई सारी सांस्कृतिक, साहित्यिक किताबों के माध्यम से भी जानकारी हासिल होती है लेकिन अगर मुख्य रूप से भारतीय संस्कृति के बारे में जानकारी लेना हो तो हड़प्पा संस्कृति के बारे में जानकारी ली जाती है ताकि सही तरीके से प्राचीन भारत के इतिहास को पढ़ा जा सके।

हड़प्पा की खोज

प्राचीन पुरातत्वविद ओर से इस बात की जानकारी हासिल होती है कि हड़प्पा की खोज 1921 में लाल बहादुर दयाराम साहनी के माध्यम से किया गया था और इसी वजह से ही दयाराम साहनी को ही हड़प्पा की खोज का श्रेय प्राप्त है। इस प्राचीन सभ्यता की खोज के बाद ही अगला कदम उठाया गया जिसे महत्वपूर्ण  कदम के रूप में देखा जाने लगा था।

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हड़प्पा सभ्यता की स्थापना

वैसे तो हड़प्पा सभ्यता की स्थापना आज से लगभग हजारों साल पहले कर दी गई थी लेकिन एक आंकड़े के अनुसार लगभग 2600 ईसवी  वर्ष पूर्व  से लगभग 4616 वर्ष पूर्व इस नगर की स्थापना हुई थी जहां इतिहासकारों ने हड़प्पा सभ्यता का काल निर्धारण 2700 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व निर्धारित किया गया था जो कहीं ना कही  सालों पहले की सभ्यता मानी जाती है।

हड़प्पा सभ्यता का दूसरा नाम

आज तक हमने हड़प्पा सभ्यता को एक बेहतरीन सभ्यता के रूप में भी जाना है लेकिन हड़प्पा सभ्यता का दूसरा नाम सिंधु सरस्वती सभ्यता भी जाना जाता है लेकिन बोलचाल की भाषा में ज्यादातर इस्तेमाल हड़प्पा सभ्यता का ही होता है।

हड़प्पा किस नदी के किनारे स्थित है

हड़प्पा सभ्यता प्राचीन सभ्यता की एक निशानी है जो रावी नदी के किनारे स्थित है। रावी नदी उत्तरी भारत में बहने वाली एक मुख्य नदी है जो हिमालय से निकलती हुई पंजाब के रास्ते से पाकिस्तान की ओर जाती है और साथ ही साथ अपनी सभ्यता का परिचय देती है।ऐसे में हड़प्पा संस्कृति मैं रावी नदी का विशेष योगदान माना जाता है जो कहीं ना कहीं इस संस्कृति को जिंदा रखने के लिए कारगर साबित होती है।

हड़प्पा सभ्यता के बारे में विशेष जानकारी

हड़प्पा सभ्यता आज तक की सबसे महत्वपूर्ण सभ्यता मानी जाती है जो लगभग हजारों साल पुरानी है। आज के समय में सिंधु घाटी सभ्यता अर्थात हड़प्पा सभ्यता अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्व क्षेत्र, पाकिस्तान  के उत्तर पश्चिम क्षेत्र और भारत के उत्तरी क्षेत्र में फैली हुई है। आज भी इतिहास के इस महत्वपूर्ण सभ्यता से संबंधित अवशेष हमें प्राप्त होते हैं जिनके माध्यम से हम आसानी से ही इस संस्कृति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

हड़प्पा सभ्यता की विशेष नगर योजना

हड़प्पा सभ्यता की विशेष नगर योजना की तारीफ की जाती है जहां अवशेष प्राप्त होते हैं जिनके अंतर्गत हम उस समय के विशेष नगर योजना से संबंधित जानकारी हासिल कर सकते हैं। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार हड़प्पा सभ्यता के मकानों के बीच में एक बड़ा आंगन हुआ करता था। इसके अलावा आंगन के चारों तरफ बड़े-बड़े कमरे और रसोईघर होते थे जो काफी बड़े हुआ करते थे। घर का आंगन में काफी बड़ा होता था जिसके चारों और लगभग 25 से 30 कमरे होते थे और भवन भी दो से तीन मंजिला हुआ करते थे। 

हड़प्पा सभ्यता के घरों की खिड़कियां बहुत ही खूबसूरती के साथ बनाई गई थी जो आकार में बड़ी होती थी एवं खुली हुई होती थी। इसके अलावा हड़प्पा सभ्यता के लोग अपने घरों को बहुत ही साफ सफाई के साथ रखते थे जहां बड़े-बड़े स्नानागार होते थे और नियमित रूप से वहां की सफाई हुआ करती थी।

हड़प्पा सभ्यता का विस्तार

हड़प्पा सभ्यता का विस्तार पुरातत्व अवशेषों के माध्यम से प्राप्त होते हैं जहां समय के अनुसार काफी बदलाव देखे गए और कई तरह से नगरों में विकास किया गया। ऐसे में हड़प्पा सभ्यता को  कल चरणों में विभाजित किया गया है।

1) प्रारंभिक हड़प्पा काल— इसे हड़प्पा सभ्यता का सबसे शुरुआती काल कहा जाता है जो 3500 ईसा पूर्व से 26 ईसा पूर्व  तक माना जाता है जहां पर मिट्टी से बने हुए बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता था साथ ही साथ इन के माध्यम से घर चलाने का कार्य किया जाता था।

2) परिपक्व हड़प्पा काल— प्रारंभिक हड़प्पा काल के बाद परिपक्व हड़प्पा काल का समय आता है जो 2600 ईसवी पूर्व से 1900 ईसवी पूर्व तक माना जाता है। इस काल में मुख्य रूप से शहरों का विकास किया जाने लगा था साथ-साथ विदेशी व्यापार को भी बढ़ावा दिया गया जिससे विविध प्रकार के संस्कृति देखने को मिली और इसके अलावा होने वाली दिक्कतों को ही समझने का प्रयास किया गया था।

3) उत्तर हड़प्पा काल— हड़प्पा काल का सबसे आखरी समय उत्तर हड़प्पा काल को माना जाता है, जो 1900 ईसवी पूर्व  से1400 ईसवी पूर्व माना जाता है जब हड़प्पा सभ्यता के शहरों को उजाड़ दिया गया और साथ ही साथ वहां पर व्यवसाय करने वाले लोगों का व्यापार भी खत्म हो चुका था जिससे शहरीकरण को भी रोकना पड़ा और मुख्य रूप से हड़प्पा काल का समापन समझा जाने लगा था।

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हड़प्पा सभ्यता में कृषि का महत्व

हड़प्पा सभ्यता में कृषि को भरपूर सहयोग प्राप्त हुआ था जहां पर लोग कृषि करके अपना पालन पोषण किया करते थे। इसके अलावा कृषि के माध्यम से कई प्रकार के फल और फूलों का भी उत्पादन किया गया जो दूसरे देशों में भेजकर व्यापार में विकास किया गया था। कृषि के अलावा लोग मदद के लिए कई सारे पालतू जानवरों को भी अपने साथ रखते थे ताकि कृषि कार्यों में उनका सहयोग लिया जा सके और सही तरीके से कृषि कार्य में आगे बढ़ा जा सके।

ऐसे लोग जो कृषि कार्य में सहयोग नहीं कर पा रहे थे वे पशु पालन किया करते थे और विभिन्न प्रकार के औजारों का इस्तेमाल करते हुए हल चलाने और जुताई करने में भी महत्वपूर्ण योगदान निभाते थे जिसके बाद हड़प्पा सभ्यता को महत्वपूर्ण और आवश्यक सभ्यता के रूप में जाना जाने लगा था।  पशु पालन के माध्यम से भी जानवरों को पाला गया उनका ख्याल रखा गया और  अपनी दिनचर्या में उन्हें भी शामिल किया गया जिसके बाद हड़प्पा सभ्यता में विशेष योगदान के माध्यम से उस सभ्यता को आगे बढ़ाने का कार्य किया गया था।

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