हिंदी भाषा के कितने अर्थ है | हिंदी भाषा की विशेषताएं | हिंदी भाषा का इतिहास

आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे, हिंदी भाषा के कितने अर्थ है, हिंदी भाषा का इतिहास क्या है और हिंदी भाषा का अर्थ और परिभाषा की पूरी जानकारी विस्तार से।  हिंदी भाषा को एक अधिकारिक भाषा के रूप में जाना जाता है, जो भारत की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। इसके अतिरिक्त भी हिंदी भाषा के कई प्रकार के अर्थों के बारे में जानकारी दी जाती है जिनके बारे में हम आपको विस्तार से बताने वाले  हैं|

हमारे भारत देश में कई प्रकार की भाषाएं बोली जाती है, जो विभिन्न जाति, धर्म के लोगों के द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में अगर आप संपूर्ण भारत की बात करें तो हिंदी भाषा का सबसे ज्यादा योगदान माना जाता है जहां नागरिक निश्चित रूप से हिंदी भाषा को मातृभाषा के रूप में पहचानते हैं और उसका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल भी करते हैं। 

हिंदी भाषा के कितने अर्थ है (हिंदी भाषा के विशेष अर्थ) 

भारत में हिंदी भाषा का उपयोग प्राचीन समय से किया जाता रहा है शुरुआत में भारत में प्राकृत और  संस्कृत भाषा का इस्तेमाल हुआ लेकिन उसके बाद से ही कई दशकों से हिंदी भाषा का इस्तेमाल किया जाता रहा है।  अगर हम संस्कृत भाषा की बात करें तो यहां पर तत्सम और तद्भव भाषा का भी ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाता रहा जिन्हें बाद में हिंदी के साथ ही आगे बढ़ाया गया।  अगर संपूर्ण विश्व की बात की जाए तो अंग्रेजी के बाद हिंदी एक ऐसी भाषा है जिसे ज्यादातर लोग बोलना  पसंद करते हैं और इसीलिए इसे सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले भाषाओं में एक प्रमुख दर्जा हासिल है|

हिंदी भाषा के जनक (Father of Hindi Language)

मुख्य रूप से हिंदी भाषा के जनक भारतेंदु हरिश्चंद्र को माना जाता है जिन्होंने हिंदी के गद्य लेखन को बहुत ही सादगी और खूबसूरती के साथ दर्शाया है। इसके अलावा उन्होंने अपनी भाषा शैली के माध्यम से ही लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

हिंदी भाषा का इतिहास (History of Hindi Language)

जैसे ही भारत में इस्लाम धर्म का समावेश हुआ उसके बाद से ही हिंदी भाषा में मिश्रण के रूप में फारसी और अरबी शब्दों का इस्तेमाल किया जाता रहा है जिनमें आज भी  हम ज्यादा से ज्यादा इन शब्दों को हिंदी में मिश्रण के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे हैं। इसके अलावा प्राचीन भाषा में उर्दू का इस्तेमाल किया जाने लगा, जहां उर्दू को भी मुसलमानों के अलावा हिंदुओं की ही भाषा  मानते हैं क्योंकि हमारे बोलने में भी उर्दू भाषा कहीं ना कहीं जाहिर हो जाती है और इस तरह से हिंदी भाषा के इतिहास में कई सारी भाषाओं में हिंदी का साथ दिया और आज के समय में भी हिंदी तत्सम तद्भव के अलावा उर्दू भाषा के साथ भी आगे बढ़ रही है 

हिंदी भाषा का वर्चस्व (Hindi Language Dominance)

आज के समय में ज्यादा से ज्यादा लोग हिंदी भाषा बोलते हैं और उसे अपनी सभ्य भाषा के रूप में जानते हैं| ऐसे में हिंदी भाषा का वर्चस्व सिर्फ हिंदुस्तान में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी माना जाता है। हिंदी भाषा एक ऐसी भाषा है जिसे विद्वानों, लेखकों और साहित्यकारों के द्वारा इस्तेमाल किया जाता है और इसीलिए इसका ज्यादा से ज्यादा योगदान हमारे राजनीतिक सफर में  देखा जाता है।  इसके अलावा आज के समय में हिंदी को एक विशेष दर्जा प्राप्त है जिसकी अपनी खुद की एक लिपि  है जिसके माध्यम से अपने मनोभावों को व्यक्त किया जा सकता है जिसका हमारे देश के कवियों और लेखकों ने बहुत ही अच्छा उपयोग किया है|

हिंदी भाषा में व्याकरण का उचित इस्तेमाल

जब भी हिंदी भाषा की बात आती है, तो व्याकरण की बात अपने आप ही आती है क्योंकि हिंदी एक ऐसी भाषा है जहां पर  व्याकरण के समावेश से उसे और भी ज्यादा खूबसूरत बनाया जा सकता है। जहां सही तरीके से अपनी बात को बोलना और उस पर अभिव्यक्ति देना भी उचित इस्तेमाल के अंतर्गत आता है| बिना व्याकरण के कोई भी भाषा अधूरी मानी जाती है उसी प्रकार हिंदी में व्याकरण को सही तरीके से बढ़ावा दिए जाने की बात की जाती है ताकि किसी भी प्रकार की दिक्कत से बचा जा सके और साथ ही साथ व्याकरण  को भी आगे ले जाया जा सके|

हिंदी भाषा की विशेषताएं (Importance of Hindi Language)

जिस प्रकार हर भाषा की कुछ विशेषता होती है उसी प्रकार हिंदी भाषा की भी कुछ मुख्य विशेषताएं होती हैं जो मुख्य हैं|

1. हिंदी भाषा के ध्वनि संकेत  दृढ़  होते हैं जिसे  परंपरागत तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है। जहां पर ध्वनि, संकेतों का इस्तेमाल व्याकरण के रूप में भी किया जाता है|

2. हिंदी भाषा में ज्यादा से ज्यादा सार्थक शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है और कभी-कभी सांकेतिक भाषा भी समान होती है लेकिन ज्यादातर मनुष्य के मनोभावों के लिए हिंदी भाषा उपयुक्त मानी जाती है|

3. यह  ऐसी भाषा है जिसे भाषा वैज्ञानिकों ने कई प्रकार की परिभाषाएं दी हैं जिनके माध्यम से हिंदी भाषा को त्रुटि हीन माना जाता है|

4. हिंदी भाषा को समझना आसान होता है जिसके माध्यम से हम दूसरों को अपनी बात समझा सकते हैं|

5. हिंदी भाषा के माध्यम से कुछ जरूरी बातों को लिखकर भी उनके अर्थ को समझा जा सकता है जैसे प्राचीन कवियों के माध्यम से किया जाता था| 

हिंदी का ज्ञान है आवश्यक 

आज के इस बदलते परिवेश में हिंदी को  पिछड़े भाषा के रूप में भी कुछ लोगों के द्वारा देखा जाता रहा है लेकिन ऐसा कहना  सर्वथा  सही नहीं होगा। हिंदी  भी एक ऐसी भाषा है जिसके माध्यम से प्रत्येक भारतीय को गर्व का अहसास होता है साथ ही साथ हिंदी भाषा के ज्ञान से अपने देश को एक नए रास्ते पर मिलाया जा सकता है और दुनिया के सामने हिंदी भाषा को सही तरीके से आगे बढ़ाने के बारे में सोचा जा सकता है| ऐसे में हिंदी भाषा के कई तरीकों के अर्थ को देखा गया है जहां पर हिंदी भाषा को कहीं ज्यादा जटिल, मिश्रित और महत्वपूर्ण माना जाता है|  ऐसे में हिंदी भाषा का ज्ञान होना हम सभी के लिए बहुत ही आवश्यक है| 

ऐसे में निश्चित रूप से हमारे देश के भावी पीढ़ी को भी हिंदी के सही अर्थ के बारे में जानकारी होना आवश्यक है ताकि वे भी इस रास्ते पर आगे चलकर सही तरीके से हिंदी का विकास कर सके और आने वाली बाधाओं को भी दूर किया जा सके|  ऐसे में हम सभी को हिंदी से दूर नहीं बल्कि उसके और करीब जाकर उसके बारे में और उसके महत्व के बारे में जानकारी लेना जरूरी माना गया है| 

Leave a Comment