किशोरों में आपराधिक प्रवृति समाज के लिए चिंता का विषय |

हल के कुछ वर्षो में देश में छोटे -बड़े बच्चो के द्वारा घटित कुछ ऐसी दर्दनाक घटनाए देखने को मिल रही है जिन्हे देखकर लगता है की अब हमारे देश के कुछ बच्चे बचपन में ही गंभीर अपराधो व दिन दहला देने वाली घटनाओ के अन्जाब देने लगे है | जो की सिथ्ति बेहद चिंताजनक है | जिस तरह से किशोर बच्चे के द्वारा आये दिन आपराधिक घटनाओ को घटित किया जा रहा है वह सोचने वाली बात है | किशोर अपराध के घटनाए बार -बार हम सभी से प्रश्न करती है की क्या इन घटनाओ के लिए वास्तव में कच्ची मिटटी के बने बच्चे जिम्मेदार है या कही न कही हमारी परवरिश व समाजिक माहौल में व्याप्त कोई कमी जिम्मेदार है ऐसे गलत काम करने के लिए बच्चो में कहा से हौसला आता है ? क्या बच्चो के माता पिता की परवरिश में कोई कमी है ? या इसका कारन परिवार के सदस्य है ? 

किशोर कौन है ?

किशोर का अर्थ एक ऐसे  व्यक्ति से है जो बहुत युवा ,बालक ,कुमार या वयस्क होने वाली आयु से कम हो | दूसरे शब्दों में किशोर का अर्थ है की जो बच्चा अभी वयस्कों की आयु तक न पहुंचे हो जिसका तातपर्य उसके अभी भी बालपन से है | कभी -कभी बच्चा शब्द किशोर के स्थान पर भी उपयोग होता है | क़ानूनी रूप में कहा जा सकता है जिससे अभी क़ानूनी रूप में कहा जाये तो एक किशोर को उस बच्चे के रूप में परिभाषित किया जाता है जिनमे अभी क़ानूनी रुओ से वयस्क आयु प्राप्त न की हो और देश के कानून के तहत उसे अपने किये हुए अपराधों के लिए वयस्क की तरह जिम्मेदार न ठहराया जा सके | कानून के शब्दों में ,एक किशोर वो व्यक्ति होता है जिसको आयु 18 वर्ष से कम हो .ये एक क़ानूनी महत्व रखता है | किशोर न्याय अधिनियम ,2000 के अनुसार एक किशोर सुनवाई और सजा के लिए उसके साथ एक वयस्क की तरह व्यवहार नहीं किया जाएगा |

किशोर अपराध क्या है ?

जब किसी बच्चे द्वारा कोई कानून -विरोध या समाज विरोध कार्य किया जाता है तो उसे किशोर अपराध या बाल अपराध कहते है | क़ानूनी दृश्टिकोण से किशोर अपराध या बाल अपराध 16 वर्ष से काम आयु के बालक द्वारा किया गया कानून विरोध कार्य है | जिसे क़ानूनी कार्यवाही के लिए बाल न्यालय के समक्ष उपस्थित किया जाता है | भारत में बाल न्याय अधिनियम 1986 के अनुसार 16 वर्ष तक की आयु के लड़को एव 18 वर्ष तक की आयु की लड़कियों के अपराध करने पर किशोर अपराध करने पर किशोर अपराधी की श्रेणी में सिम्लिखित किया गया है | किशोर उम्र के बालक द्वारा किया गया क़ानूनी विरोधी कार्य किशोर अपराध है | केवल आयु ही किशोर अपराध को निर्धारित नहीं करती ,अपराध की गंभीरता भी एक बहुत आवश्यक पक्ष है | 16 वर्ष का लड़का और 18 वर्ष की लड़की द्वारा कोई भी ऐसा अपराध न किया गया हो जिसके लिए राज्य मृत्यु दण्ड और आजीविका कारावास देता है | जैसे हत्या ,देशद्रोह ,घातक ,आक्रमण आदि तो वह किशोर अपराधी माना जाएगा |
किशोर अपराध के कारण
किशोर अपराध एक इरादतन अपराध नहीं बल्कि एक बहुत गम्भीर सामाजिक व पारिवारिक समस्या है | जिसके अधिकांश कारण भी समाज व परिवार में ही विद्यमान होता है ,ऐसे में सवाल उठता है की आखिर बच्चो की इस हिंसक प्रवृति के पीछे क्या वजह है | हमको समझने होगा की इस हिंसक प्रवृति के पीछे क्या वजह है |हमको समझना होगा की कोई भी बच्चा जन्मजात अपराधी नहीं होता बल्कि परिस्थितियॉ उसे ऐसा बना देती है | किसी भी बालक के व्यक्तित्व को रूप देने में घर के अंदर और बहार का सामाजिक सांस्कृतिक पारिवारिक वातावरण एक बहुत ही महत्वपुर्ण भूमिका निभाता है इसी वातावरण और हालातो के चलते कुछ किशोर अपराध से जुड़ जाते है | जिसके कुछ निम्न कारण है |
माता पिता के आपसी मनमुटाव व् लड़ाई झगड़े के चलते तनाव पूर्ण होते रिश्ते ,एकल परिवार ,मोबाईल फ़ोन ,कंप्यूटर ,इंटरनेट ,सरलता से मिली फोटोग्राफी बच्चो को गलत डिश में ले जाने के लिए प्रेरित करती है |इसके आलावा बच्चो को अन्य तनाव भरे पारिवारिक रिश्ते ,अपराधी भाई -बेहेन व् परिजनों का होना ,माता -पिता द्वारा तिरस्कार ,परिवार की खस्ताहाल ,माली हालत ,मनोवैज्ञानिक कारण,सामुदायिक कारण ,नशीली दवाइया का सेवन ,असामाजिक साथियो की मित्रमंडली ,पारिवारिक हिंसा ,बाल योन शोषण और मिडिया की भूमिका आदि भी अपराध करने के लिए प्रेरित करने के बहुत बड़े कारण है |
कैसे पहचाने किशोर का बदलता व्यवहार 
हर माता -पिता का दायित्व है की वो बच्चो का अच्छे ढंग से ध्यान रखे और उनके व्यवहार में आ रहे बदलाव के जाने उसकी जड़ तक पहुंचे जैसे की “अगर बच्चा स्कूल जाने से आनी-कानी करने लगे ,स्कूल से रोजाना शिकायते आने लगे ,साथी बच्चो को गली देना ,गलत संगत में बैठना ,किसी एक काम पर ध्यान ना लग पाना ,आवारागर्दी करना ,हर समय मोबाईल या इंटरने पर लगे रहना आदि यह सभी लक्षण दिखने पर समझ जाना चाहिए की बच्चो के व्यवहार में बदलाव आने लगा है | और अब उसपर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है ऐसे हालात में बच्चो को वक्त देना बहुत जरुरी है ,उसे बाहर घुमाने ले जाना चाहिए ,उसके साथ अलग -अलग खेल खेलना चाहिए ,बाते करनी चाहिए ,बच्चो का मन बहुत ही कोमल होता है इसलिए उनको जरूरत से ज्यादा नहीं समझाना चाहिए ,बात बात में उनकी गलतिया नहीं निकालनी चाहिए |
किशोर अपराध पर नियंत्रण
 
वैसे हमारे देश में बहुत से कानून के विशेषज्ञ का मानना है की देश में वर्तमान कानून व् बाल सुधर ग्रह के खस्ताहाल अपराधी प्रवृति के बच्चो की स्थिति में सुधर करने और नियंत्रण करने के लिए अपर्याप्त है |हमे इनमे  तत्काल बदलाव लेन की जरूरत है | साथ ही आज देश की किशोरावस्था में अपराध के सामान्य प्रवृति के मामले व् गंभीर प्रवृति के मामलो में बार बार लिप्त होने वाले बच्चो में अंतर् करना आवश्यक है | बार बार गंभीर अपराधों के लिए अब बच्चो को भी वयस्कों की तरह दंडित किये जाने की मांग देश में उठने लगी है |
हमारे देश में किशोर अपराध का अलग न्यायविधान है | उनके न्यायधीश एक अन्य न्यायाधिकारी बाल -मनोविज्ञानिक के जानकर होते है | वहा किशोर अपराधी को दंड नहीं दिया जाता ,बल्कि उनके जीवन के आधार पर उनका और उनके वातावरण का अध्यन करके वातावरण में स्थित अशान्तोषजनक ,अपराध को जन्म देने वाले तत्व में सुधार करके बच्चो के सुधार का प्रयत्न किया जाता है |
साथ ही अब समय आ गया है की विभिन देशो की तरह भारत में किशोर अपराधी को सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर ठोस और कारगर प्रयास धरातल पर किये जाये हलाकि सरकार के मौजूद प्रावधान में से अब किशोर अपराधों की पुनावृत्ति में थोड़ी कमी आ गयी है फिर भी अभी इन उपायों में काफी खामिया है |जिन्हे तत्काल दूर करना आवश्यक है जिससे कोई भी बालक अपराध की दिशा में ना जाए |

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