भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन |

विभिन्न यूरोपीय शक्तियों का भारत और दक्षिण एशिया की तरफ आने का शुरुआती उद्देश्य मसालों का व्यापार था, जिसकी यूरोप में बहुत मांग थी |

क्रम संख्या कंपनी का नाम आने का वर्ष

1. पुर्तगाली         1498

2. ईस्ट इंडिया कंपनी (UK) 1600

3. डच (नीदरलैंड)         1602

4. डेनिश (डेनमार्                     1616

5. फ्रांस         1664 

भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन 

पुर्तगालियों का आगमन

15th शताब्दी के बाद से ही पुर्तगाली अफ्रीका के रास्ते से भारत का रास्ता ढूंढ रहे थे | पुर्तगाली भारत में सबसे पहले आने वाले यूरोपीय थे | पुर्तगाल का वास्कोडिगामा 1497 अफ्रीका के पश्चिमी तट से शुरुआत करते हुए भारत को ढूंढने निकला | वह दक्षिण अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप से होते हुए पूर्वी अफ्रीका में भारतीय गुजराती व्यापारियों की सहायता से अरब सागर होते हुए सर्वप्रथम 1498 भारत पहुंचा |

शुरुआत में पुर्तगालियों के प्रतिद्वंदी व्यापारी अरब थे, क्योंकि अरब पहले से ही भारत के साथ व्यापार करते थे | और ऑटोमन साम्राज्य के समय यूरोप में भारतीय मसाले अरब लोग ही पहुंचाते थे |

शुरुआत में पुर्तगालियों ने भारत के साथ व्यापार शुरू किया तो उन्होंने अरब लोगों पर, उनके नावों पर बहुत सारे हमले किए | और भारत के साथ अरब के व्यापार को खत्म करवा के पुर्तगालियों ने कालीकट, कन्नूर और कोच्चि में अपनी फैक्ट्रियां खोली |

200 वर्षों के दौरान पुर्तगालियों ने लगभग पूरे भारत के समुद्र तट पर कब्जा कर लिया था, लेकिन फिर भी यह अंग्रेजों से ज्यादा ताकतवर नहीं बन पाए इसके प्रमुख कारण ही निम्न है-

#पुर्तगालियों ने समुद्री तटों के अलावा जमीन पर या भारत के अंदर कभी ताकत हासिल नहीं की |

#पुर्तगाली धार्मिक कट्टर थे, इस कारण से स्थानीय लोगों में यह लोकप्रिय नहीं बन पाए |

#प्रशासन में भ्रष्टाचार के कारण कंपनी आगे नहीं बढ़ पाई |

#पुर्तगाल के पास में संसाधनों की कमी थी तथा वह स्पेन के अधीन हो चुका था |

डचों का आगमन

सर्वप्रथम कॉर्नेलिस हाउटमेन 1596 में भारत आने वाला पहला डच व्यक्ति था | 1602 में “यूनाइटेड ईस्ट इंडिया कंपनी ऑफ नीदरलैंड” अस्तित्व में आई |

1605 में डचों ने सबसे पहले मसूलिपटनम (आंध्र प्रदेश) में फैक्ट्री स्थापित की उसके बाद इन्होंने कालीकट और सूरत में भी फैक्ट्री स्थापित की |  1759 में वेदरा की लड़ाई में ईस्ट इंडिया कंपनी से हारने के बाद भारत में सीमित हो गए और उनका व्यापार इंडोनेशिया की तरह ज्यादा हो गया |

ईस्ट इंडिया कंपनी का आगमन

1599 ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की गई जिसे 1600 में महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने रॉयल चार्टर के द्वारा पूर्व (भारत, दक्षिण-पूर्व एशियाई, पूर्वी अफ्रीका, आदि) से व्यापार करने का एकाधिकार दे दिया |

1612 में सुवाली के युद्ध में ईस्ट इंडिया कंपनी ने पुर्तगालियों को हरा दिया और 1613 में सूरत में अपनी पहली फैक्ट्री स्थापित की |  ईस्ट इंडिया कंपनी को 1668 में ब्रिटिश सरकार द्वारा, पुर्तगालियों से दहेज में प्राप्त मुंबई प्राप्त हुआ | 1717 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने मुगल सम्राट फर्रूखसियर से दस्तक व्यापार पत्र प्राप्त कर लिया, जिसकी सहायता से यह बिना किसी रोक-टोक के व्यापार कर सकते थे |

7 वर्ष बाद, 1764 में बक्सर के युद्ध में अंग्रेजो ने मुगल सेना, अवध के नवाब और बंगाल के नवाब मीर कासिम तीनों की सेना को हरा दिया और भारत में अपनी जड़ें मजबूत कर दी | व्यापार के उद्देश्य से भारत में आई ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1947 तक भारत पर शासन किया| 

डेनिश का भारत में आगमन

डेनमार्क की ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1616 में की गई थी | व्यापार के उद्देश्य से यह भी भारत में आए और उन्होंने 1620 में ट्रेंकुबार में सबसे पहले अपनी फैक्ट्री स्थापित की | 1676 में सेरामपुर  में मुख्यालय स्थापित किया | अंग्रेजों के बढ़ते दबदबे के कारण 1845 में अपने व्यापार ईस्ट इंडिया कंपनी को बेच कर भारत छोड़कर चली गई |

फ्रांसीसीयों का आगमन

भारत में सबसे अंतिम यूरोपीय आने वाली शक्ति फ्रांसीसी थी | फ्रांस के सम्राट लुई 14वे के मंत्री कॉलबर्ट ने 1664 में फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की थी |

फ्रांसीसी ने 1667 में सूरत में अपनी पहली फैक्ट्री स्थापित की थी | फ्रांसिस मार्टिन ने 1673 में पांडिचेरी की स्थापना की थी |

1740 में डुप्ले फ्रांसीसी गवर्नर बन कर भारत में आया | परंतु उसे भी ईस्ट इंडिया कंपनी से हार का सामना करना पड़ा | 1760 में वांडीवाश की लड़ाई के बाद फ्रांसीसीयों का असतित्व समाप्त हो गया |

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