भारत में रहने वाले यहूदियों की ऐतिहासिक कहानी

 



4000 साल पुराना है यहूदी धर्म

यहूदी दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक है. माना जाता है कि यहूदी धर्म आज से लगभग 4000 साल पुराना है. वर्तमान इजराइल देश का राजधर्म यहूदी ही है|

यहूदियों के इतिहास के बारे में ईसाईयों के धर्म ग्रंथ बाइबिल के प्रथम खंड और यहूदियों के सबसे प्राचीन ग्रंथ ‘ओल्ड टेस्टामेंट’ में भी काफी कुछ लिखा है. ओल्ड टेस्टामेंट के अनुसार, यहूदी धर्म की शुरूआत ईसा से 2000 साल पहले पैदा हुए पैगंबर हजरत अब्राहम से होती है. इन्हें इस्लाम में इब्राहिम, ईसाईयों में अब्राहम कहा जाता है.

इस धर्म का इतिहास मिस्र के नील नदी से लेकर वर्तमान इराक़ के दजला-फुरात नदी के बीच आरंभ हुआ और आज का इसरायल एकमात्र यहूदी राष्ट्र है। यहूदी परम्परा के अनुसार, पहले यहूदी मिस्र के फराओं के अन्दर गुलाम होते थे। बाद में मूसा के नेतृत्व में वे इसरायल आ गए। ईसा के 1100 साल पहले जैकब के 12 संतानों के आधार पर अलग-अलग यहूदी कबीले बने। ये दो खेमों में बँट गए – एक, जो 10 कबीलों का बना था इसरायल कहलाया और दो, जो बाकी के दो कबीलों से बना था वो जुडाया कहलाया। 10 कबीलों वाले इसरायल का क्या हुआ इसका पता नहीं है। जुडाया पर बेबीलन का अधिकार हो गया। 

यहूदियों के ईश्वर यहोवा हैं. यहोवा का जिक्र ईसाईयों के पवित्र ग्रंथ बाइबिल में भी कई बार आया है. इनके मंदिरों में कोई भगवान की मूर्ति नहीं होती. यहूदी लोग एक ईश्वर की पूजा करते हैं.

यहूदियों के पवित्र ग्रंथ का नाम है तनख. ये इब्रानी या हिब्रू जबान में लिखा हुआ है. इसे तालमुद या तोरा भी कहा जाता है.माना जाता है कि इजराइल की राजधानी जेरुशलम में यहूदियों का पवित्र मंदिर सुलैमानी हुआ करता था, जिसकी आज एक दीवार ही शेष बची है. इसी दीवार की ओर मुंह कर यहूदी लोग पूजा करते हैं. कहा जाता है कि यहीं पर हजरत मूसा ने यहूदियों को धर्म की शिक्षा दी थी.

#भारत में यहूदी 

भारत ने सदियों से 3 विशिष्ट प्राचीन यहूदी समूहों बेने इज़राइली, कोचीन यहूदी और यूरोप से आए सफेद यहूदियों की विरासत को संभाले रखा है. इन्हें फलने-फूलने का मौका दिया है.|भारत में यहूदियों का इतिहास बताता है कि मध्ययुगीन काल में व्यापार के उद्देश्यों के लिए यूरोप के यहूदी व्यापारियों ने भारत की यात्रा की थीं| भारत में रहने वाले यहूदियों के बारे में पहला विश्वसनीय साक्ष्य 11वीं शताब्दी की शुरुआत में मिलता है. माना जाता है कि पहले यहूदी बस्तियां भारत के पश्चिमी तट पर बसाई गई थीं.|16वीं और 17वीं सदी में किए गए प्रवासों के दौरान फारस, अफगानिस्तान और चरासीन (मध्य एशिया) से आए यहूदियों ने उत्तरी भारत और कश्मीर में बस्तियों का निर्माण किया था.|

मुंबई था यहूदियों का बड़ा केंद्र

18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक बंबई भारत में यहूदी समुदाय का सबसे बड़ा केंद्र था. बेने इज़राइली यहूदी बंबई में रहते थे. इसके बाद इराकी और फिर फारसी यहूदी यहां आए|

बेने इजराइली यहूदियों का वो समूह है, जो लगभग दो हजार साल पहले भारत के कोंकण क्षेत्र के गांव से निकलकर भारतीय शहरों में बस गए. बेने इज़राइली मुख्य रूप से बंबई, पुणे, कराची और अहमदाबाद जैसे शहरों में रहते थे. इनकी मूल भाषा जुदेओ-मराठी थी|

ये लोग करीब 2,100 साल पहले भारत आए थे. इन्होंने एक जहाज के द्वारा इजराइल से मुंबई के दक्षिण में नौगांव तक का सफर किया था| जेरुशलेम सेंटर फॉर पब्लिक अफेयर के अनुसार, इजरायल, रूस और ईरान के बाद भारत का यहूदी समुदाय चौथा सबसे बड़ा एशियाई यहूदी समुदाय है. 1830 के दशक में, भारत में रहने वाले यहूदी समुदाय की संख्या 6,000 थी. सदी के अंत तक ये संख्या बढ़कर लगभग 10,000 हो गई|

1948 में जब इज़राइल राष्ट्र को एक देश के तौर पर वैश्विक मान्यता मिली और तब से ज्यादातर बेने इज़राइली इज़राइल चले गए. अब लगभग 5,000 से भी कम यहूदी भारत में रहते हैं.

सबसे पहले कहा बसे यहूदी ?

दक्षिणी भारत के कोचीन में रहने वाले ‘काले यहूदी’ भारत आने वाले पहले यहूदी माने जाते हैं. वर्तमान में केरल राज्य के मूल निवासी ये लोग परंपरागत रूप से जुदेओ-मलयालम भाषा बोलते है |

इज़राइल के राजा सुलैमान के शासनकाल के दौरान इजराइल साम्राज्य के विभाजन के बाद ये यहूदी मालाबार के तट पर आकर बस गए थे|

इनके बाद व्हाइट यहूदी भारत में आए, जो पश्चिमी यूरोपीय देशों जैसे हॉलैंड और स्पेन से भारत आये थे. ये लोग लादीनो की प्राचीन सेफर्डिक भाषा बोलते थे. 15वीं शताब्दी में स्पेनिश और पुर्तगाली यहूदियों ने गोव में आना शुरू किया था|

वहीं, 17वीं और 18वीं सदी में मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका और स्पेन से आने वाले यहूदी कोचीन में बस गए|

#यहूदियों का व्यपार |

18वीं शताब्दी के अंत में, भारतीय यहूदियों का एक तीसरा समूह दिखाई दिया. ये मध्य-पूर्व के यहूदी थे, जो व्यापार करने के लिए भारत आए थे. इन्होंने अलेप्पो से बगदाद, बसरा से सूरत/बॉम्बे तक, कलकत्ता से रंगून, सिंगापुर से हांगकांग तक और कोबे, जापान तक अपने व्यापार नेटवर्क को फैला लिया था|

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